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क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता!
मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है, किसी का भी हो सर, क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता| जावेद अख़्तर
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रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता!
जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता, मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता| जावेद अख़्तर
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सड़क!
एक बार फिर से मैं आज श्री रामदरश मिश्र जी की एक लंबी रचना शेयर कर रहा हूँ| इस कविता में सड़क कवि को ज़िंदगी के किन मुहानों पर ले जाती है, यह महसूस करने लायक है| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री रामदरश मिश्र जी की यह कविता – सड़क ने कहा-‘‘चलोगे ?’’‘‘कहाँ ?’’‘‘दायरे से…
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लिए दिल नहीं थोड़ा करते!
शहद जीने का मिला करता है थोड़ा थोड़ा, जाने वालों के लिए दिल नहीं थोड़ा करते| गुलज़ार