Category: Uncategorized
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नींद चुराने वाली- रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…
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भीगी पलकें न झुका!
एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट और मुकेश जी का एक प्यारा गीत, एक बार और! आज मुझे मेरे प्रिय गायक स्वर्गीय मुकेश जी का गाया एक बहुत सुंदर गीत याद आ रहा है | फिल्म- साथी के लिए इस गीत को लिखा था मजरूह सुल्तानपुरी साहब ने और इसका संगीत दिया था- नौशाद साहब ने| कुल…
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अब के बरस भी यहीं से निकलेगा!
गुज़िश्ता साल के ज़ख़्मो हरे-भरे रहना, जुलूस अब के बरस भी यहीं से निकलेगा| राहत इन्दौरी
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डूबेगा सूरज वहीं से निकलेगा!
बुज़ुर्ग कहते थे इक वक़्त आएगा जिस दिन, जहाँ पे डूबेगा सूरज वहीं से निकलेगा| राहत इन्दौरी
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ख़ज़ाना यहीं से निकलेगा!
इसी गली में वो भूखा फ़क़ीर रहता था, तलाश कीजे ख़ज़ाना यहीं से निकलेगा| राहत इन्दौरी