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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 11th Oct 2022

    रहे सामने और दिखाई न दे!

    ख़ुदा ऐसे एहसास का नाम है, रहे सामने और दिखाई न दे| बशीर बद्र

  • 11th Oct 2022

    असीरों को ऐसी रिहाई न दे!

    ग़ुलामी को बरकत समझने लगें, असीरों को ऐसी रिहाई न दे| बशीर बद्र

  • 11th Oct 2022

    सदा सिसकियों की सुनाई न दे!

    हँसो आज इतना कि इस शोर में, सदा सिसकियों की सुनाई न दे| बशीर बद्र

  • 11th Oct 2022

    इतनी ज़ियादा सफ़ाई न दे!

    ख़ता-वार समझेगी दुनिया तुझे, अब इतनी ज़ियादा सफ़ाई न दे| बशीर बद्र

  • 11th Oct 2022

    अपने सिवा कुछ दिखाई न दे!

    ख़ुदा हमको ऐसी ख़ुदाई न दे, कि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे| बशीर बद्र

  • 11th Oct 2022

    किसने बाँसुरी बजाई!

    आज मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि एवं नवगीतकार स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी की एक रचना, शेयर कर रहा हूँ| इनको साहित्य के क्षेत्र में अनेक सम्मानों के साथ ही पद्मश्री सम्मान देने की भी पेशकश की गई थी जिसको उन्होंने अस्वीकार कर दिया था| लीजिए, प्रस्तुत है स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी की यह रचना-…

  • 10th Oct 2022

    हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा!

    किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल, कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा| अहमद फ़राज़

  • 10th Oct 2022

    इख़्लास समझते हो ‘फ़राज़!

    तुम तकल्लुफ़ को भी इख़्लास समझते हो ‘फ़राज़,’ दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलाने वाला| अहमद फ़राज़

  • 10th Oct 2022

    तिरे साथ एक दुनिया थी!

    हुआ है तुझ से बिछड़ने के बा’द ये मा’लूम, कि तू नहीं था तिरे साथ एक दुनिया थी| अहमद फ़राज़

  • 10th Oct 2022

    चाहिएँ कितनी मोहब्बतें तुझे!

    और ‘फ़राज़’ चाहिएँ कितनी मोहब्बतें तुझे, माओं ने तेरे नाम पर बच्चों का नाम रख दिया| अहमद फ़राज़

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