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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th Apr 2023

    आज करामात हो गई!

    वक़्त-ए-ग़ुरूब आज करामात हो गई, ज़ुल्फ़ों को उसने खोल दिया रात हो गई| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 18th Apr 2023

    चाँद की नब्ज़ देखना!

    चाँद की नब्ज़ देखना उठकर, रात की साँस गर्म लगती है| गुलज़ार

  • 18th Apr 2023

    साए पे पाँव रखता हूँ!

    अपने साए पे पाँव रखता हूँ, छाँव छालों को नर्म लगती है| गुलज़ार

  • 18th Apr 2023

    आवारा, छलिया, अनाड़ी, दीवाना!

    आज एक बार फिर मैं अपनी एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ| हाल ही में मैंने अपने प्रिय गायक मुकेश जी की पुण्य तिथि पर उनका एक गीत शेयर किया था| आज मन है कि स्वर्गीय राज कपूर जी के साथ उनके अंतरंग संबंध को याद करूं| राजकपूर जी के अधिकांश गाने मुकेश…

  • 17th Apr 2023

    तन्हाई बज़्म लगती है!

    बज़्म-ए-याराँ में रहता हूँ तन्हा, और तन्हाई बज़्म लगती है| गुलज़ार

  • 17th Apr 2023

    एक नज़्म लगती है!

    कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है, ज़िंदगी एक नज़्म लगती है| गुलज़ार

  • 17th Apr 2023

    बहुत बुलंद उड़ा!

    अकेला पत्ता हवा में बहुत बुलंद उड़ा, ज़मीं से पाँव उठाओ हवाएँ भेजी हैं| गुलज़ार

  • 17th Apr 2023

    हमने ख़ताएँ भेजी हैं!

    तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं, सज़ाएँ भेज दो हमने ख़ताएँ भेजी हैं| गुलज़ार

  • 17th Apr 2023

    चमकती हुई कनारी है!

    सियाह रंग चमकती हुई कनारी है, पहन लो अच्छी लगेंगी घटाएँ भेजी हैं| गुलज़ार

  • 17th Apr 2023

    तुमको रुलाएँ भेजी हैं

    तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं, वो सारी चीज़ें जो तुमको रुलाएँ, भेजी हैं| गुलज़ार

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