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आज करामात हो गई!
वक़्त-ए-ग़ुरूब आज करामात हो गई, ज़ुल्फ़ों को उसने खोल दिया रात हो गई| फ़िराक़ गोरखपुरी
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आवारा, छलिया, अनाड़ी, दीवाना!
आज एक बार फिर मैं अपनी एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ| हाल ही में मैंने अपने प्रिय गायक मुकेश जी की पुण्य तिथि पर उनका एक गीत शेयर किया था| आज मन है कि स्वर्गीय राज कपूर जी के साथ उनके अंतरंग संबंध को याद करूं| राजकपूर जी के अधिकांश गाने मुकेश…
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हमने ख़ताएँ भेजी हैं!
तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं, सज़ाएँ भेज दो हमने ख़ताएँ भेजी हैं| गुलज़ार
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तुमको रुलाएँ भेजी हैं
तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं, वो सारी चीज़ें जो तुमको रुलाएँ, भेजी हैं| गुलज़ार