Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 20th Apr 2023

    सँवरता नहीं हूँ मैं!

    पहचान ही न पाऊँ ख़ुद अपने ही अक्स को, इतना भी आइने में सँवरता नहीं हूँ मैं| राजेश रेड्डी

  • 20th Apr 2023

    बाज़ार-ए-आरज़ू से

    शर्मिंदा अपनी जेब को करता नहीं हूँ मैं, बाज़ार-ए-आरज़ू से गुज़रता नहीं हूँ मैं| राजेश रेड्डी

  • 20th Apr 2023

    नसीबों की तरह तू!

    मुँह फेर के जाना है तुझे जा तिरी मर्ज़ी, मत रूठ मगर मुझ से नसीबों की तरह तू| राजेश रेड्डी

  • 20th Apr 2023

    उमीदों की तरह तू!

    चाहा था बहुत मैंने भुला दूँ तुझे लेकिन, जाता ही नहीं दिल से उमीदों की तरह तू| राजेश रेड्डी

  • 20th Apr 2023

    मिरी नींदों की तरह तू!

    सुख-चैन मिरा लूटने वाले आ किसी दिन, मुझको भी चुरा ले मिरी नींदों की तरह तू| राजेश रेड्डी

  • 20th Apr 2023

    तिरी यादों की तरह तू!

    ऐसे न बिछड़ आँखों से अश्कों की तरह तू, आ लौट के आ फिर तिरी यादों की तरह तू| राजेश रेड्डी

  • 20th Apr 2023

    शाख़ फल तो सकती है

    हुई है गर्म लहु पी के इश्क़ की तलवार, यूँ ही जिलाए जा ये शाख़ फल तो सकती है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 20th Apr 2023

    बात खल तो सकती है!

    जो तूने तर्क-ए-मोहब्बत को अहल-ए-दिल से कहा, हज़ार नर्म हो ये बात खल तो सकती है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 20th Apr 2023

    पिघल तो सकती है!

    सुना है बर्फ़ के टुकड़े हैं दिल हसीनों के, कुछ आँच पा के ये चाँदी पिघल तो सकती है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 20th Apr 2023

    आत्‍मकथ्‍य!

    आज एक बार फिर से मैं छायावाद युग के एक प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय जयशंकर प्रसाद जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ, प्रसाद जी की रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय जयशंकर प्रसाद जी की यह रचना  – मधुप गुन-गुनाकर कह जाता कौन कहानी अपनी यह,मुरझाकर गिर रहीं…

←Previous Page
1 … 972 973 974 975 976 … 1,530
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,132 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar