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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 3rd Nov 2022

    इसी हसरत में मर गए!

    दुनिया से हट के इक नई दुनिया बना सकें, कुछ अहल-ए-आरज़ू इसी हसरत में मर गए| महेश चंद्र नक़्श

  • 3rd Nov 2022

    हादसे जो दिल पे हमारे गुज़र गए!

    तस्वीर-ए-ज़िंदगी में नया रंग भर गए, वो हादसे जो दिल पे हमारे गुज़र गए| महेश चंद्र नक़्श

  • 3rd Nov 2022

    सत्य नहीं होता सपना है!

    आज एक बार फिर मैं किसी ज़माने में कविता में अपने अनूठे अंदाज़ के कारण घूम मचाने वाले स्वर्गीय बलबीर सिंह ‘रंग’ जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह ‘रंग’ जी का यह गीत- सत्य नहीं होता सपना है।सपनों में लाखों आते हैं,जो मन वीणा पर गाते हैं;पर…

  • 2nd Nov 2022

    यारों ने भी दिल तोड़ दिया है!

    अग़्यार का शिकवा नहीं इस अहद-ए-हवस में, इक उम्र के यारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श

  • 2nd Nov 2022

    बहारों ने भी दिल तोड़ दिया है!

    माना कि थी ग़मगीन कली ख़ौफ़-ए-ख़िज़ाँ से, चुप रह के बहारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श

  • 2nd Nov 2022

    इशारों ने भी दिल तोड़ दिया है!

    किस तरह करें तुझ से गिला तेरे सितम का, मदहोश इशारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श

  • 2nd Nov 2022

    सितारों ने भी दिल तोड़ दिया है!

    इस डूबते सूरज से तो उम्मीद ही क्या थी, हँस हँस के सितारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श

  • 2nd Nov 2022

    किनारों ने भी दिल तोड़ दिया है!

    तूफ़ान का शेवा तो है कश्ती को डुबोना, ख़ामोश किनारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श

  • 2nd Nov 2022

    नज़ारों ने भी दिल तोड़ दिया है!

    पुर-कैफ़ बहारों ने भी दिल तोड़ दिया है, हाँ उनके नज़ारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श

  • 2nd Nov 2022

    उड़ने दे घनश्याम गगन में!

    स्वर्गीय माखनलाल चतुर्वेदी जी अपने युग के एक महत्वपूर्ण कवि थे, जिन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा पद्मभूषण जैसे विशिष्ट सम्मान भी प्राप्त हुए थे| लीजिए, आज प्रस्तुत है स्वर्गीय माखनलाल चतुर्वेदी जी की यह कविता – उड़ने दे घनश्याम गगन में| बिन हरियाली के माली परबिना राग फैली लाली परबिना वृक्ष ऊगी डाली परफूली नहीं…

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