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इसी हसरत में मर गए!
दुनिया से हट के इक नई दुनिया बना सकें, कुछ अहल-ए-आरज़ू इसी हसरत में मर गए| महेश चंद्र नक़्श
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हादसे जो दिल पे हमारे गुज़र गए!
तस्वीर-ए-ज़िंदगी में नया रंग भर गए, वो हादसे जो दिल पे हमारे गुज़र गए| महेश चंद्र नक़्श
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सत्य नहीं होता सपना है!
आज एक बार फिर मैं किसी ज़माने में कविता में अपने अनूठे अंदाज़ के कारण घूम मचाने वाले स्वर्गीय बलबीर सिंह ‘रंग’ जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह ‘रंग’ जी का यह गीत- सत्य नहीं होता सपना है।सपनों में लाखों आते हैं,जो मन वीणा पर गाते हैं;पर…
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यारों ने भी दिल तोड़ दिया है!
अग़्यार का शिकवा नहीं इस अहद-ए-हवस में, इक उम्र के यारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श
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बहारों ने भी दिल तोड़ दिया है!
माना कि थी ग़मगीन कली ख़ौफ़-ए-ख़िज़ाँ से, चुप रह के बहारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श
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इशारों ने भी दिल तोड़ दिया है!
किस तरह करें तुझ से गिला तेरे सितम का, मदहोश इशारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श
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सितारों ने भी दिल तोड़ दिया है!
इस डूबते सूरज से तो उम्मीद ही क्या थी, हँस हँस के सितारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श
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किनारों ने भी दिल तोड़ दिया है!
तूफ़ान का शेवा तो है कश्ती को डुबोना, ख़ामोश किनारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श
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नज़ारों ने भी दिल तोड़ दिया है!
पुर-कैफ़ बहारों ने भी दिल तोड़ दिया है, हाँ उनके नज़ारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श