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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd May 2023

    किनारा है इन दिनों!

    हर सैल-ए-अश्क साहिल-ए-तस्कीं है आज-कल, दरिया की मौज मौज किनारा है इन दिनों| क़तील शिफ़ाई 

  • 2nd May 2023

    वही चारा है इन दिनों

    दिल को ग़म-ए-हयात गवारा है इन दिनों, पहले जो दर्द था वही चारा है इन दिनों| क़तील शिफ़ाई 

  • 2nd May 2023

    स्वेटर!

    आज एक बार फिर से मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|  सर्वेश्वर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की यह कविता  – तुमने जो स्वेटर मुझे बुनकर दिया है उसमें कितने…

  • 1st May 2023

    मुकम्मल नहीं होते!

    सब ख़्वाहिशें पूरी हों ‘फ़राज़’ ऐसा नहीं है, जैसे कई अशआर मुकम्मल नहीं होते| अहमद फ़राज़

  • 1st May 2023

    पागल नहीं होते!

    उश्शाक़ के मानिंद कई अहल-ए-हवस भी, पागल तो नज़र आते हैं पागल नहीं होते| अहमद फ़राज़

  • 1st May 2023

    कुछ याद-जज़ीरे हैं!

    कैसे ही तलातुम हों मगर क़ुल्ज़ुम-ए-जाँ में, कुछ याद-जज़ीरे हैं कि ओझल नहीं होते| अहमद फ़राज़

  • 1st May 2023

    जल-थल नहीं होते!

    शाइस्तगी-ए-ग़म के सबब आँखों के सहरा, नमनाक तो हो जाते हैं जल-थल नहीं होते| अहमद फ़राज़ 

  • 1st May 2023

    कभी हल नहीं होते!

    कुछ मुश्किलें ऐसी हैं कि आसाँ नहीं होतीं, कुछ ऐसे मुअम्मे हैं कभी हल नहीं होते| अहमद फ़राज़

  • 1st May 2023

    करिश्मे भी अजब हैं!

    अंदर की फ़ज़ाओं के करिश्मे भी अजब हैं, मेंह टूट के बरसे भी तो बादल नहीं होते| अहमद फ़राज़

  • 1st May 2023

    मगर कल नहीं होते!

    ऐसा है कि सब ख़्वाब मुसलसल नहीं होते, जो आज तो होते हैं मगर कल नहीं होते| अहमद फ़राज़

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