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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd Nov 2022

    इशारों ने भी दिल तोड़ दिया है!

    किस तरह करें तुझ से गिला तेरे सितम का, मदहोश इशारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श

  • 2nd Nov 2022

    सितारों ने भी दिल तोड़ दिया है!

    इस डूबते सूरज से तो उम्मीद ही क्या थी, हँस हँस के सितारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श

  • 2nd Nov 2022

    किनारों ने भी दिल तोड़ दिया है!

    तूफ़ान का शेवा तो है कश्ती को डुबोना, ख़ामोश किनारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श

  • 2nd Nov 2022

    नज़ारों ने भी दिल तोड़ दिया है!

    पुर-कैफ़ बहारों ने भी दिल तोड़ दिया है, हाँ उनके नज़ारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श

  • 2nd Nov 2022

    उड़ने दे घनश्याम गगन में!

    स्वर्गीय माखनलाल चतुर्वेदी जी अपने युग के एक महत्वपूर्ण कवि थे, जिन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा पद्मभूषण जैसे विशिष्ट सम्मान भी प्राप्त हुए थे| लीजिए, आज प्रस्तुत है स्वर्गीय माखनलाल चतुर्वेदी जी की यह कविता – उड़ने दे घनश्याम गगन में| बिन हरियाली के माली परबिना राग फैली लाली परबिना वृक्ष ऊगी डाली परफूली नहीं…

  • 1st Nov 2022

    वक़्तों के ख़यालात न लिखने पाऊँ!

    ख़ुद को माज़ी में रखूँ हाल में रहते हुए भी, नए वक़्तों के ख़यालात न लिखने पाऊँ| राजेश रेड्डी

  • 1st Nov 2022

    उनसे मैं शिकायात न लिखने पाऊँ!

    शुक्र ही शुक्र लिखे जाऊँ मैं उनके हक़ में, कभी उनसे मैं शिकायात न लिखने पाऊँ| राजेश रेड्डी

  • 1st Nov 2022

    उनकी मगर मात न लिखने पाऊँ!

    जीत पर उनकी लगा दूँ मैं क़सीदों की झड़ी, मात को उनकी मगर मात न लिखने पाऊँ| राजेश रेड्डी

  • 1st Nov 2022

    मिरे हाथ न लिखने पाऊँ!

    सोच तो लेता हूँ क्या लिखना है पर लिखते समय, काँपते क्यूँ है मिरे हाथ न लिखने पाऊँ| राजेश रेड्डी

  • 1st Nov 2022

    उठती है वो बात न लिखने पाऊँ!

    बस क़लम-बंद किए जाऊँ मैं उनकी हर बात, दिल से जो उठती है वो बात न लिखने पाऊँ| राजेश रेड्डी

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