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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th May 2023

    क्या क़यामत आएगी

    और भी क्या क़यामत आएगी, पूछना है तिरी जवानी से| गुलज़ार देहलवी

  • 9th May 2023

    हसीनों की मेहरबानी!

    हम से पूछो तो ज़ुल्म बेहतर है, इन हसीनों की मेहरबानी से| गुलज़ार देहलवी

  • 9th May 2023

    कितनी सूरतें उभरीं!

    ख़ाक से कितनी सूरतें उभरीं, धुल गए नक़्श कितने पानी से| गुलज़ार देहलवी

  • 9th May 2023

    उलझता है ज़िंदगानी से

    उस सितमगर की मेहरबानी से, दिल उलझता है ज़िंदगानी से| गुलज़ार देहलवी

  • 9th May 2023

    नाम अधरों पर आया!

    लीजिए आज एक बार फिर मैं अपने समय के प्रमुख हिन्दी कवि और बाल पत्रिका पराग के संपादक रहे स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| नंदन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की यह कविता  – एक नाम…

  • 8th May 2023

    अख़बार किया जाना है

    कौन पढ़ता है यहाँ खोल के अब दिल की किताब, अब तो चेहरे को ही अख़बार किया जाना है| राजेश रेड्डी

  • 8th May 2023

    उकता गए हो जिससे

    एक ही बार में उकता से गए हो जिससे, ये तमाशा तो कई बार किया जाना है| राजेश रेड्डी

  • 8th May 2023

    बातों में कब तक!

    ख़्वाबों और ख़्वाहिशों की बातों में आकर कब तक, ख़ुद को रुस्वा सर-ए-बाज़ार किया जाना है| राजेश रेड्डी

  • 8th May 2023

    इज़हार किया जाना है

    मसअला ये नहीं कि इश्क़ हुआ है हमको, मसअला ये है कि इज़हार किया जाना है| राजेश रेड्डी

  • 8th May 2023

    आईने में अपनी सूरत

    देखनी है कभी आईने में अपनी सूरत, इक मुख़ालिफ़ को तरफ़-दार किया जाना है| राजेश रेड्डी

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