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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 10th May 2023

    ग़मों का इल्म नहीं!

    ऐ इश्क़ ये सब दुनिया वाले बे-कार की बातें करते हैं, पायल के ग़मों का इल्म नहीं झंकार की बातें करते हैं| शकील बदायूनी

  • 10th May 2023

    तक़दीर पे रोना आया!

    दिल गँवाकर भी मोहब्बत के मज़े मिल न सके, अपनी खोई हुई तक़दीर पे रोना आया| शकील बदायूनी

  • 10th May 2023

    देख के दिल सहम गया

    पहले क़ासिद की नज़र देख के दिल सहम गया, फिर तिरी सुर्ख़ी-ए-तहरीर पे रोना आया| शकील बदायूनी

  • 10th May 2023

    ता’बीर पे रोना आया!

    क्या हसीं ख़्वाब मोहब्बत ने दिखाया था हमें, खुल गई आँख तो ता’बीर पे रोना आया| शकील बदायूनी

  • 10th May 2023

    ज़ंजीर पे रोना आया!

    इश्क़ की क़ैद में अब तक तो उमीदों पे जिए, मिट गई आस तो ज़ंजीर पे रोना आया| शकील बदायूनी

  • 10th May 2023

    तस्वीर पे रोना आया!

    आज फिर गर्दिश-ए-तक़दीर पे रोना आया, दिल की बिगड़ी हुई तस्वीर पे रोना आया| शकील बदायूनी

  • 10th May 2023

    भर दिया जाम!

    प्रसिद्ध हिन्दी गीत कवि और संपादक श्री बालस्वरूप राही जी का एक गीत मैं आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| राही जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह गीत  – भर दिया जाम जब तुमने अपने हाथों सेप्रिय! बोलो, मैं इंकार करूँ भी…

  • 10th May 2023

    B

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  • 9th May 2023

    हो गए कहानी से!

    हाए क्या दौर-ए-ज़िंदगी गुज़रा, वाक़िए हो गए कहानी से| गुलज़ार देहलवी

  • 9th May 2023

    सरा-ए-फ़ानी से!

    हसरत-ए-उम्र-ए-जावेदाँ लेकर, जा रहे हैं सरा-ए-फ़ानी से| गुलज़ार देहलवी

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