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चिड़ियों को आज़ाद किया!
खोल के खिड़की चाँद हँसा फिर चाँद ने दोनों हाथों से, रंग उड़ाए फूल खिलाए चिड़ियों को आज़ाद किया| निदा फ़ाज़ली
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खोल के फिर आबाद किया!
आज ज़रा फ़ुर्सत पाई थी आज उसे फिर याद किया, बंद गली के आख़िरी घर को खोल के फिर आबाद किया| निदा फ़ाज़ली
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माँ!
आज मैं श्री रामदरश मिश्र जी की माँ के बारे में लिखी गई एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इस छोटी सी कविता ने मुझे काफी प्रभावित किया है| मैंने श्री रामदरश मिश्र जी की कुछ कविताएं पहले भी शेयर की हैं| लीजिए प्रस्तुत है श्री रामदरश मिश्र जी की यह कविता – चेहरे परकुछ…