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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 24th Nov 2025

    क़दम ये हम ने!

    महा-बली से बग़ावत बहुत ज़रूरी है,क़दम ये हम ने समझ सोच कर उठाया है| राहत इंदौरी

  • 24th Nov 2025

    हवा का टूटा हुआ!

    बुलंदियों को पता चल गया कि फिर मैं ने,हवा का टूटा हुआ एक पर उठाया है| राहत इंदौरी

  • 24th Nov 2025

    कोई कोई आदमी दीवाना होता है!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज, अपने स्वर में मुकेश जी का एक और मधुर गीत शेयर कर रहा हूँ- कोई कोई आदमी दीवाना होता है मुश्किल उस नादान को समझाना होता है। आशा है आपको पसंद आएगा, धन्यवाद।

  • 24th Nov 2025

    ये आसमान जिसे!

    यही ज़मीं में दबाएगा एक दिन हम को,ये आसमान जिसे दोश पर उठाया है| राहत इंदौरी

  • 24th Nov 2025

    शाख पर इक फूल भी है!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कुंवर बेचैन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय डॉक्टर कुंवर बेचैन जी का यह गीत- है समय प्रतिकूल मानापर समय अनुकूल भी है।शाख पर इक फूल भी है॥   घन तिमिर…

  • 23rd Nov 2025

    मगर ये कौन है!

    मिरी ग़ुलैल के पत्थर का कार-नामा था,मगर ये कौन है जिस ने समर उठाया है| राहत इंदौरी

  • 23rd Nov 2025

    ये बोझ वो है जिसे!

    हमेशा सर पे रही इक चटान रिश्तों की,ये बोझ वो है जिसे उम्र-भर उठाया है| राहत इंदौरी

  • 23rd Nov 2025

    सवाल घर नहीं!

    सवाल घर नहीं बुनियाद पर उठाया है,हमारे पाँव की मिट्टी ने सर उठाया है| राहत इंदौरी

  • 23rd Nov 2025

    फ़ैसले बदलती हैं!

    ‘वसीम’ आओ इन आँखों को ग़ौर से देखो,यही तो हैं जो मिरे फ़ैसले बदलती हैं| वसीम बरेलवी

  • 23rd Nov 2025

    बहुत क़रीब हुए !

    बहुत क़रीब हुए जा रहे हो सोचो तो,कि इतनी क़ुर्बतें जिस्मों से कब सँभलती हैं| वसीम बरेलवी

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