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कोई कोई आदमी दीवाना होता है!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज, अपने स्वर में मुकेश जी का एक और मधुर गीत शेयर कर रहा हूँ- कोई कोई आदमी दीवाना होता है मुश्किल उस नादान को समझाना होता है। आशा है आपको पसंद आएगा, धन्यवाद।
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शाख पर इक फूल भी है!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कुंवर बेचैन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय डॉक्टर कुंवर बेचैन जी का यह गीत- है समय प्रतिकूल मानापर समय अनुकूल भी है।शाख पर इक फूल भी है॥ घन तिमिर…
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ये बोझ वो है जिसे!
हमेशा सर पे रही इक चटान रिश्तों की,ये बोझ वो है जिसे उम्र-भर उठाया है| राहत इंदौरी