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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 27th May 2026

    मुझ को शिकवा है !

    कर दिया गर्दिश-ए-अय्याम ने रुस्वा ‘साहिर’,मुझ को शिकवा है यगाने से न बेगाने से| साहिर होशियारपुरी

  • 27th May 2026

    चला आया हूँ मयख़ाने से!

    खाए जाती है नदामत मुझे इस ग़फ़लत की,होश में आ के चला आया हूँ मयख़ाने से| साहिर होशियारपुरी

  • 27th May 2026

    वो दिल जो मैंने मांगा था!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में साहिर लुधियानवी जी का एक और शेर- वो दिल जो मैंने मांगा था मग़र गैरों ने पाया है! फ़िल्म-शगुनगीतकार- साहिर लुधियानवीसंगीतकार-खय्यामगायिका- जगजीत कौरप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ********

  • 27th May 2026

    बुझ गई शम्अ’ भी!

    हुस्न बे-इश्क़ कहीं रह नहीं सकता ज़िंदा,बुझ गई शम्अ’ भी परवाने के जल जाने से| साहिर होशियारपुरी

  • 27th May 2026

    हो गया ढेर वहीं!

    हो गया ढेर वहीं आह भी निकली न कोई,जाने क्या बात कही शम्अ’ ने परवाने से| साहिर होशियारपुरी

  • 27th May 2026

    जाएं तो जाएं कहां!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ यह गीत- जाएं तो जाएं कहां, समझेगा कौन यहां, दर्द भरे दिल की ज़ुबां!फ़िल्म- टैक्सी ड्राइवरगीतकार- साहिर लुधियानवीसंगीतकार- सचिन देव बर्मनगायक- तलत महमूदप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 27th May 2026

    गीतों से पहले!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री रवींद्र भ्रमर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। भ्रमर जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। आज प्रस्तुत है श्री रवींद्र भ्रमर की यह कविता – पँछी में गाने का गुन हैदो तिनके चुनकरवह तृप्त जहाँ होता हैगीतों की कड़ियाँबोता है !सूखा पेड़कँटीली टहनीबियाबान,…

  • 26th May 2026

    मौत ख़ुद काँपती है!

    मौत का ख़ौफ़ हो क्या इश्क़ के दीवाने को,मौत ख़ुद काँपती है इश्क़ के दीवाने से| साहिर होशियारपुरी

  • 26th May 2026

    ये पूछिए परवाने से!

    इश्क़ क्या चीज़ है ये पूछिए परवाने से,ज़िंदगी जिस को मयस्सर हुई जल जाने से| साहिर होशियारपुरी

  • 26th May 2026

    मैं देखूं तो सही दुनिया तुम्हे कैसे सताती है!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है आज अगला शेर यह लता जी का गाया बहुत मधुर गीत है जिसमें विरहिन की वह स्थिति दर्शाई गई है कि प्रेमी के दूर हो जाने पर वह भरी दुनिया में अकेली हो जाती है। फ़िल्म- सज़ागीतकार- साहिर लुधियानवीसंगीतकार- सचिन देव बर्मनगायिका- लता मंगेशकरप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा…

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