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कुछ था तिरा ख़याल भी!
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी, दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी| परवीन शाकिर
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निर्बीज क्यों हो चले हम!
आज मैं एक बार फिर हिन्दी के श्रेष्ठ कवि और गीतकार श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम ठाकुर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत– इस तरह निर्बीज -सेक्यों हो चले हम आजहरियल घास…