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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Jun 2023

    बदलने का इरादा!

    ज़माने को बदलने का इरादा, कहा तो था तुझे बेकार होगा| राजेश रेड्डी

  • 5th Jun 2023

    कलाकार!

    आज मैं श्री रामदरश मिश्र जी की एक ही शीर्षक से लिखी दो कविताएँ प्रस्तुत कर रहा हूँ|  उनकी कुछ कविताएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री रामदरश मिश्र जी की यह कविताएँ – 1. छोटा हो या बड़ाकच्चा हो या पक्काझोंपड़ी हो या महल, घर तो घर होता हैआदमी…

  • 4th Jun 2023

    दरिया के मुसाफ़िर!

    समझ जाते हैं दरिया के मुसाफ़िर, जहाँ मैं हूँ वहाँ मंजधार होगा| राजेश रेड्डी

  • 4th Jun 2023

    नाकामियाँ ढूँढ लेंगी!

    उसे नाकामियाँ ख़ुद ढूँड लेंगी, यहाँ जो साहब-ए-किरदार होगा| राजेश रेड्डी

  • 4th Jun 2023

    उस बच्चे की दुनिया!

    बदल जाएगी उस बच्चे की दुनिया, जब उसके सामने अख़बार होगा| राजेश रेड्डी

  • 4th Jun 2023

    कोई त्यौहार होगा!

    ये सारे शहर में दहशत सी क्यूँ है, यक़ीनन कल कोई त्यौहार होगा| राजेश रेड्डी

  • 4th Jun 2023

    रेत का अम्बार होगा!

    ख़ज़ाना कौन सा उस पार होगा, वहाँ भी रेत का अम्बार होगा| राजेश रेड्डी

  • 4th Jun 2023

    होगा हल शायद!

    चाँद डूबे तो चाँद ही निकले, आपके पास होगा हल शायद|     गुलज़ार

  • 4th Jun 2023

    कोई पल शायद!

    राख को भी कुरेद कर देखो, अभी जलता हो कोई पल शायद| गुलज़ार

  • 4th Jun 2023

    प्रेम प्रताप!

    आज मैं हिन्दी आलोचना के शिखर पुरुष स्वर्गीय रामचन्द्र शुक्ल जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ|  नीरज जी की कविता मैं आज पहली बार शेयर कर रहा हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामचन्द्र शुक्ल जी की यह कविता – जग के सबही काज प्रेम ने सहज बनाये,जीवन सुखमय किया शांति के स्रोत…

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