-
हमसे अदावतों की!
पीछे पड़ा है सब के जो परछाइयों का पाप,हम से अदावतों की वो आदत भी ले न जाए| शीन काफ़ निज़ाम
-
पुरखों से जो मिली!
पुरखों से जो मिली है वो दौलत भी ले न जाए,ज़ालिम हवा-ए-शहर है इज़्ज़त भी ले न जाए| शीन काफ़ निज़ाम
-
उसी मालिक ने मुझे भी तो मोहब्बत दी है!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में मुकेश जी का गाया दीवाना फिल्म का यह गाना प्रस्तुत कर रहा हूँ- ए सनम जिसने तुझे चांद सी सूरत दी है,उसी मालिक ने मुझे भी तो मोहब्बत दी है। आशा है आपको पसंद आएगा,धन्यवाद ।
-
ज़िंदा रहना है तो!
मत सिखा लहजे को अपनी बर्छियों के पैंतरे,ज़िंदा रहना है तो लहजे को ज़रा मा’सूम कर| राहत इंदौरी
-
जाऊंगा कहाँ!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय केदार नाथ सिंह जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय केदार नाथ सिंह जी की यह कविता- जाऊंगा कहाँरहूँगा यहीं किसी किवाड़ परहाथ के निशान की तरहपड़ा रहूँगा किसी पुराने…
-
आज फिर निकला हूँ!
शाम तक लौट आऊँगा हाथों का ख़ाली-पन लिए,आज फिर निकला हूँ मैं घर से हथेली चूम कर| राहत इंदौरी
-
जागती आँखों के!
जागती आँखों के ख़्वाबों को ग़ज़ल का नाम दे,रात भर की करवटों का ज़ाइक़ा मंज़ूम कर| राहत इंदौरी
-
टूट कर बिखरी हुई!
टूट कर बिखरी हुई तलवार के टुकड़े समेट,और अपने हार जाने का सबब मा’लूम कर| राहत इंदौरी
-
रास्ते के पत्थरों से!
ज़िंदगी को ज़ख़्म की लज़्ज़त से मत महरूम कर,रास्ते के पत्थरों से ख़ैरियत मा’लूम कर| राहत इंदौरी