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कोट!
आज एक बार फिर मैं अपने समय के अत्यंत श्रेष्ठ और सृजनशील कवि स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ, इस कविता में सर्वेश्वर जी ने एक कोट के माध्यम से अत्यंत प्रभावशाली अभिव्यक्ति की है| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की यह कविता – खूँटी पर…
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जान से जाए पर इल्तिजा न करे!
ज़माना देख चुका है परख चुका है इसे, ‘क़तील’ जान से जाए पर इल्तिजा न करे| क़तील शिफ़ाई
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नसीबों ने मेरे प्यार का चाँद!
बुझा दिया है नसीबों ने मेरे प्यार का चाँद। , कोई दिया मिरी पलकों पे अब जला न करे| क़तील शिफ़ाई
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वफ़ा पे भरोसा रहे न दुनिया को!
अगर वफ़ा पे भरोसा रहे न दुनिया को, तो कोई शख़्स मोहब्बत का हौसला न करे| क़तील शिफ़ाई
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उसको मोहब्बत दुआएँ देती है!
सुना है उसको मोहब्बत दुआएँ देती है, जो दिल पे चोट तो खाए मगर गिला न करे| क़तील शिफ़ाई
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नहीं मरता कोई जुदाई में!
ये ठीक है नहीं मरता कोई जुदाई में, ख़ुदा किसी को किसी से मगर जुदा न करे| क़तील शिफ़ाई
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मिरी ज़िंदगी वफ़ा न करे!
रहेगा साथ तिरा प्यार ज़िंदगी बनकर, ये और बात मिरी ज़िंदगी वफ़ा न करे| क़तील शिफ़ाई
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भूल के ज़िंदा रहूँ ख़ुदा न करे!
वो दिल ही क्या तिरे मिलने की जो दुआ न करे, मैं तुझको भूल के ज़िंदा रहूँ ख़ुदा न करे| क़तील शिफ़ाई
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युगावतार गांधी!
भारतीय स्वाधीनता आंदोलन और गांधी जी के बारे में अनेक श्रेष्ठ कविताएं लिखने वाले स्वर्गीय सोहनलाल द्विवेदी जी की एक प्रसिद्ध कविता मैं आज शेयर कर रहा हूँ, जो महात्मा गांधी जी के क्रांतिकारी नेतृत्व और प्रभाव का बखान करती है| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय सोहनलाल द्विवेदी जी की यह प्रसिद्ध कविता – चल पड़े…