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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 13th Dec 2022

    दहलीज़ पुकारेगी जिधर जाओगे!

    इतना आसाँ नहीं लफ़्ज़ों पे भरोसा करना, घर की दहलीज़ पुकारेगी जिधर जाओगे| निदा फ़ाज़ली

  • 13th Dec 2022

    तेज़ हवाएँ हैं बिखर जाओगे!

    घर से निकले तो हो सोचा भी किधर जाओगे, हर तरफ़ तेज़ हवाएँ हैं बिखर जाओगे| निदा फ़ाज़ली

  • 13th Dec 2022

    कुंठा!

    स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| मन में पल रही कुंठा को इस कविता में एक पौराणिक चरित्र के माध्यम से चित्रित किया गया है| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की यह कविता – मेरी कुंठारेशम के कीड़ों-सीताने-बाने बुनती,तड़प तड़पकरबाहर आने को सिर धुनती,स्वर सेशब्दों सेभावों सेऔ’ वीणा…

  • 12th Dec 2022

    ज़ख़्म दिए हैं किसी को फूल दिए!

    किसी को ज़ख़्म दिए हैं किसी को फूल दिए, बुरी हो चाहे भली हो मगर ख़बर में रहो| राहत इन्दौरी

  • 12th Dec 2022

    मैंने कहा था कि मेरे घर में रहो!

    है अब ये हाल कि दर दर भटकते फिरते हैं, ग़मों से मैंने कहा था कि मेरे घर में रहो| राहत इन्दौरी

  • 12th Dec 2022

    आग लगी हो तो अपने घर में रहो!

    जला न लो कहीं हमदर्दियों में अपना वजूद, गली में आग लगी हो तो अपने घर में रहो| राहत इन्दौरी

  • 12th Dec 2022

    कभी दिल कभी नज़र में रहो!

    कभी दिमाग़ कभी दिल कभी नज़र में रहो, ये सब तुम्हारे ही घर हैं किसी भी घर में रहो| राहत इन्दौरी

  • 12th Dec 2022

    किताबों की तरह पढ़ने लगे!

    एक इक पल को किताबों की तरह पढ़ने लगे, उम्र भर जो न किया हम ने वो अब करते हैं| राहत इन्दौरी

  • 12th Dec 2022

    मगर बात ही कब करते हैं!

    ख़ुद को पत्थर सा बना रक्खा है कुछ लोगों ने, बोल सकते हैं मगर बात ही कब करते हैं| राहत इन्दौरी

  • 12th Dec 2022

    उसे धुन है मसीहाई की!

    देखिए जिसको उसे धुन है मसीहाई की, आज कल शहर के बीमार मतब* करते हैं|*इलाज राहत इन्दौरी

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