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भीड़-भाड़ में!
आज एक बार फिर मैं अपने समय में काव्य मंचों पर धूम मचाने वाले स्वर्गीय मुकुट बिहारी ‘सरोज’ जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| सरोज जी के गीत भी कुछ अलग तरह के होते थे और उनकी प्रस्तुति भी काफी रोचक होती थी| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मुकुट बिहारी ‘सरोज’ जी का…
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उसकी पशेमानी मुझे दे दो!
वो दिल जो मैंने माँगा था मगर ग़ैरों ने पाया है, बड़ी शय है अगर उसकी पशेमानी मुझे दे दो|
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अपनी निगहबानी मुझे दे दो!
मैं देखूँ तो सही दुनिया तुम्हें कैसे सताती है, कोई दिन के लिए अपनी निगहबानी मुझे दे दो| साहिर लुधियानवी
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ये दुख ये हैरानी मुझे दे दो!
ये माना मैं किसी क़ाबिल नहीं हूँ इन निगाहों में, बुरा क्या है अगर ये दुख ये हैरानी मुझे दे दो| साहिर लुधियानवी
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दिल की वीरानी मुझे दे दो!
तुम अपना रंज-ओ-ग़म अपनी परेशानी मुझे दे दो, तुम्हें ग़म की क़सम इस दिल की वीरानी मुझे दे दो| साहिर लुधियानवी