-
रौशनी अंधेरे का विलोम नहीं होती!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि कुमारेंद्र पारस नाथ सिंह जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है कुमारेंद्र पारस नाथ सिंह जी की यह कविता- यहाँ से वहाँ तक दौड़ती रहती है।कभी-कभीजब बहुत घना हो जाता है अंधेरा,लगता है,/ नहीं है–…
-
वो सुबह कभी तो आएगी!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज अपने स्वर में फिल्म- फिर सुबह होगी, के लिए मुकेश जी का गाया यह बहुत सुंदर गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- वो सुबह कभी तो आएगी आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद।