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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 6th Feb 2026

    कमानों में खिंचे हैं!

    कमानों में खिंचे हैं तीर तलवारें हैं चमकी,ज़रा ठहरो कहाँ जाते हो दरिया देखने को। मंज़र भोपाली

  • 6th Feb 2026

    एक दिन बिक जायेगा माटी के मोल!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में, फिल्म -धरम करम के लिए मुकेश जी का गाया प्रसिद्ध गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे राज कपूर जी पर फिल्माया गया था- एक दिन बिक जायेगा माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल। आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 6th Feb 2026

    झूमती चली हवा- शाहदरा की यादें!

    आज अपनी बहुत पुरानी ब्लॉग पोस्ट दोहरा रहा हूँ, मई 2017 में जब मैंने ब्लॉग लिखना शुरू किया था, तब शायद 9 वीं पोस्ट थी यह, मेरी जीवन यात्रा व्यावहारिक रूप से शाहदरा से शुरू हुई थी और वहीं से ब्लॉग यात्रा भी। लीजिए आज यह पुरानी पोस्ट पढ़ लीजिए, तब लगता था कि जीवन…

  • 5th Feb 2026

    भोंदूमल बेकार थे!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में काका हाथरसी जी की यह कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ- भोंदूमल बेकार थे, हुआ पिलपिला हाल! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। ******

  • 5th Feb 2026

    बहुत से आइना-ख़ाने!

    बहुत से आइना-ख़ाने हैं इस बस्ती में लेकिन,तरसती है हमारी आँख चेहरा देखने को। मंज़र भोपाली

  • 5th Feb 2026

    पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में, मन्ना डे जी का गाया प्रसिद्ध गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे लिखा था शैलेंद्र जी ने और इसका संगीत दिया थ सचिन देव बर्मन जी ने- पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई, एक पल जैसे एक युग बीतायुग बीते मोहे नींद न आई।…

  • 5th Feb 2026

    तमाशा देखने को!

    खड़े हैं राह चलते लोग कितनी ख़ामुशी से,सड़क पर मरने वालों का तमाशा देखने को। मंज़र भोपाली

  • 5th Feb 2026

    हवाए संदली हैं!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि श्री सोम ठाकुर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। सोम जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत– हवाए संदली हैंहम बचें कैसे?समय के विष बुझेनाख़ून बढ़ते हैं देखती आँखें छलक कररक्त का…

  • 4th Feb 2026

    गए थे शौक़ से हम भी!

    गए थे शौक़ से हम भी ये दुनिया देखने को,मिला हम को हमारा ही तमाशा देखने को। मंज़र भोपाली

  • 4th Feb 2026

    तो सारा ज़माना है!

    वो ऐ ‘कैफ़’ जिस दिन से मेरे हुए हैं,तो सारा ज़माना है शैदाइयों में| कैफ़ भोपाली

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