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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th Jan 2023

    ख़ुद ज़हर-ए-तमन्ना की तरफ़!

    हम भी अमृत के तलबगार रहे हैं लेकिन, हाथ बढ़ जाते हैं ख़ुद ज़हर-ए-तमन्ना की तरफ़| राही मासूम रज़ा

  • 14th Jan 2023

    दीमकों के नाम हैं!

    आज मैं, श्रेष्ठ कवि और मंच संचालक श्री शिव ओम अम्बर जी की लिखी एक हिन्दी ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ| कविता अपनी श्रेष्ठता की गवाही स्वयं देती है, वैसे यह रचना भी कविता के क्षेत्र में फैली अराजकता को लेकर है| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री शिव ओम अम्बर जी की यह ग़ज़ल –…

  • 13th Jan 2023

    ज़िन्दगी के अलामात हैं अभी!

    सीने में ज़िन्दगी के अलामात हैं अभी,गो ज़िन्दगी की कोई ज़रूरत नहीं रही| दुष्यंत कुमार

  • 13th Jan 2023

    सच कहो तो बुरा मानते हैं लोग!

    हिम्मत से सच कहो तो बुरा मानते हैं लोग,रो—रो के बात कहने की आदत नहीं रही| दुष्यंत कुमार

  • 13th Jan 2023

    वैसी अदावत नहीं रही!

    कुछ दोस्तों से वैसे मरासिम नहीं रहे,कुछ दुश्मनों से वैसी अदावत नहीं रही| दुष्यंत कुमार

  • 13th Jan 2023

    मुल्क में हमारी हक़ूमत नहीं रही!

    हमको पता नहीं था हमें अब पता चला,इस मुल्क में हमारी हक़ूमत नहीं रही| दुष्यंत कुमार

  • 13th Jan 2023

    भद्रजन, भद्रलोक

    अभी नया वर्ष शुरू हुआ है और एक-दो घटनाएं ऐसी हो गईं, देश-विदेश में और ऐसी जिनमें भारतीय शामिल थे| विशेष रूप से इन पर बात करने का विचार इसलिए भी आया कि ऐसी घटनाओं को फ़्लाइट्स में अंजाम दिया गया| वायुयान से यात्रा करने वाले लोग, कम से कम भारतवर्ष में काफी हद तक…

  • 11th Jan 2023

    दुष्ट डाकिया-रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…

  • 11th Jan 2023

    किसी ख़ुदा की इनायत नहीं रही!

    हमने तमाम उम्र अकेले सफ़र किया,हम पर किसी ख़ुदा की इनायत नहीं रही| दुष्यंत कुमार

  • 10th Jan 2023

    रोशनी थी वो भी सलामत नहीं रही!

    कैसी मशालें ले के चले तीरगी में आप,जो रोशनी थी वो भी सलामत नहीं रही| दुष्यंत कुमार

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