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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 24th Jan 2026

    तुम अगर मुझको न चाहो तो!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं, अपने स्वर में मुकेश जी का गाया यह प्रसिद्ध गीत शेयर कर रहा हूँ- तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं, तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी। आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद । ******

  • 24th Jan 2026

    कलम और कुदाली!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय रामदरश मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामदरश मिश्र जी की यह कविता– न जाने कब से हाथ में कलम हैवह काग़ज़ पर लिख रही है-ऋतुएँ, पेड़, फूल,…

  • 23rd Jan 2026

    उन को भी क्या ख़बर!

    जो ख़ुद को कह रहे हैं कि मंज़िल-शनास हैं, उन को भी क्या ख़बर है मगर पूछते चलो| साहिर लुधियानवी

  • 23rd Jan 2026

    यारो कोई तो उन की!

    हम से अगर है तर्क-ए-तअ’ल्लुक़ तो क्या हुआ,यारो कोई तो उन की ख़बर पूछते चलो| साहिर लुधियानवी

  • 23rd Jan 2026

    अब आएँ या न आएँ!

    अब आएँ या न आएँ इधर पूछते चलो,क्या चाहती है उन की नज़र पूछते चलो| साहिर लुधियानवी

  • 23rd Jan 2026

    तिरे ख़यालों से दूर जा के!

    न सोचने पर भी सोचती हूँ कि ज़िंदगानी में क्या रहेगा,तिरी तमन्ना को दफ़्न कर के तिरे ख़यालों से दूर जा के| साहिर लुधियानवी

  • 23rd Jan 2026

    दूल्हा और घोड़ी !

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं स्वर्गीय ओम प्रकाश आदित्य जी की एक बहुत पुरानी हास्य कविता का जो अंश मुझे याद है वह अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- नए नए दूल्हा थे, नई नई घोड़ी थी! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। ******

  • 23rd Jan 2026

    ये तो कहो कौन हो तुम!

    अपने यूफिट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं आशिक़ फिल्म के लिए मुकेश जी का गाया यह गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- ये तो कहो कौन हो तुम, कौन हो तुम! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवा *****

  • 23rd Jan 2026

    चुप रहेंगे नज़र झुका के!

    कभी मिलेंगे जो रास्ते में तो मुँह फिरा कर पलट पड़ेंगे,कहीं सुनेंगे जो नाम तेरा तो चुप रहेंगे नज़र झुका के| साहिर लुधियानवी

  • 23rd Jan 2026

    जब-जब सिर उठाया!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। सर्वेश्वर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की यह कविता– जब-जब सिर उठायाजब-जब सिर उठायाअपनी चौखट से टकराया।मस्तक पर लगी चोट,मन में उठी…

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