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आ जा मिरी रूठी हुई!
यूँ तोड़ न मुद्दत की शनासाई इधर आ,आ जा मिरी रूठी हुई तन्हाई इधर आ| मुज़फ़्फ़र हनफ़ी
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झूम झूम के नाचो आज!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज अपने स्वर में मुकेश जी का एक और लोकप्रिय गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- झूम झूम के नाचो आज, गाओ खुशी के गीत,आज किसी की हार हुई है, आज किसी की जीत! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******
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आज हैं केसर रंग रंगे वन!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय गिरिजाकुमार माथुर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गिरिजाकुमार माथुर जी का यह गीत- आज हैं केसर रंग रंगे वनरंजित शाम भी फागुन की खिली खिली पीली कली-सीकेसर के वसनों…
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कश्तियाँ देना मगर!
कश्तियाँ देना मगर इज़्न-ए-सफ़र से पहले,ठहरे पानी को भी दरिया की रवानी देना| क़ैसर शमीम
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मिरी आँखों को अगर !
पोंछ लेना मिरी पलकों से लहू की बूँदें,मिरी आँखों को अगर मंज़र-ए-सानी देना| क़ैसर शमीम
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तिरी आवाज़ से जब!
तिरी आवाज़ से जब टूटे मिरे घर का सुकूत,दर-ओ-दीवार को भी सेहर-बयानी देना| क़ैसर शमीम
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पत्तों की तरह बे-दर्द!
छूटे न कभी फूलों का नगर कोशिश तो यही है अपनी मगर,इक रोज़ उड़ा ले जाएगी पत्तों की तरह बे-दर्द हवा| क़ैसर शमीम