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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Mar 2023

    तुम्हारे चरण!

    लंबे अंतराल के बाद आज मैंने स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक रचना प्रस्तुत की| लेकिन फिर मालूम हुआ कि यह रचना मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| उनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए अब प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक और कविता– ये शरद के चाँद-से उजले…

  • 5th Mar 2023

    सृजन का शब्द!

    लंबे अंतराल के बाद आज फिर से मैं स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ| भारती जी ने साहित्य की हर विधा में अपना अमूल्य योगदान किया था- उपन्यास, कहानियाँ, कविताएं, गीत, संस्मरण आदि-आदि और ‘धर्मयुग’ जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका का संपादन भी किया| उनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की…

  • 4th Mar 2023

    मंज़िल की तरफ़ तेरे क़दम आते हैं!

    एक इक कर के हुए जाते हैं तारे रौशन, मेरी मंज़िल की तरफ़ तेरे क़दम आते हैं| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 4th Mar 2023

    काबे में सनम आते हैं!

    दिल में अब यूँ तिरे भूले हुए ग़म आते हैं, जैसे बिछड़े हुए काबे में सनम आते हैं| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 4th Mar 2023

    हारे भी तो बाज़ी मात नहीं!

    गर बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है जो चाहो लगा दो डर कैसा, गर जीत गए तो क्या कहना हारे भी तो बाज़ी मात नहीं| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 4th Mar 2023

    याँ नाम-ओ-नसब की पूछ कहाँ!

    मैदान-ए-वफ़ा दरबार नहीं याँ नाम-ओ-नसब की पूछ कहाँ, आशिक़ तो किसी का नाम नहीं कुछ इश्क़ किसी की ज़ात नहीं| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 4th Mar 2023

    क्या ऐसे भी हालात नहीं!

    मुश्किल हैं अगर हालात वहाँ दिल बेच आएँ जाँ दे आएँ, दिल वालो कूचा-ए-जानाँ में क्या ऐसे भी हालात नहीं| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 4th Mar 2023

    अब हिज्र की कोई रात नहीं!

    कब याद में तेरा साथ नहीं कब हात में तेरा हात नहीं, सद-शुक्र कि अपनी रातों में अब हिज्र की कोई रात नहीं| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 4th Mar 2023

    चुपचाप उल्लास!

    आज एक बार फिर से मैं हिन्दी के एक अनूठे रचनाकार स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ| बातचीत के सहज लहजे में गहरी बात कह देना भवानी दादा की विशेषता रही है| उनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी…

  • 3rd Mar 2023

    हिज्र ने नाशाद किया!

    कुछ नहीं इसके सिवा ‘जोश’ हरीफ़ों का कलाम, वस्ल ने शाद किया हिज्र ने नाशाद किया| जोश मलीहाबादी

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