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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Mar 2023

    ‘मीर’ का दीवान यहाँ भी है वहाँ भी!

    उठता है दिल-ओ-जाँ से धुआँ दोनों तरफ़ ही, ये ‘मीर’ का दीवान यहाँ भी है वहाँ भी| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Mar 2023

    खेल का मैदान यहाँ भी है वहाँ भी!

    रहमान की रहमत हो कि भगवान की मूरत, हर खेल का मैदान यहाँ भी है वहाँ भी| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Mar 2023

    इंसान परेशान यहाँ भी है वहाँ भी!

    हिन्दू भी सुकूँ से है मुसलमाँ भी सुकूँ से, इंसान परेशान यहाँ भी है वहाँ भी| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Mar 2023

    दरिंदों के फ़क़त नाम अलग हैं!

    ख़ूँ-ख़्वार दरिंदों के फ़क़त नाम अलग हैं, हर शहर बयाबान यहाँ भी है वहाँ भी| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Mar 2023

    हैवान यहाँ भी है वहाँ भी!

    इंसान में हैवान यहाँ भी है वहाँ भी, अल्लाह निगहबान यहाँ भी है वहाँ भी| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Mar 2023

    लहू तो तीर कमानों में बट गया!

    ख़बरों ने की मुसव्वरी ख़बरें ग़ज़ल बनीं, ज़िंदा लहू तो तीर कमानों में बट गया| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Mar 2023

    चंद मचानों में बट गया!

    हैं ताक में शिकारी निशाना हैं बस्तियाँ, आलम तमाम चंद मचानों में बट गया| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Mar 2023

    वो चंद मकानों में बट गया!

    जब तक था आसमान में सूरज सभी का था, फिर यूँ हुआ वो चंद मकानों में बट गया| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Mar 2023

    वक़्त गेहूँ के दानों में बट गया!

    पहले तलाशा खेत फिर दरिया की खोज की, बाक़ी का वक़्त गेहूँ के दानों में बट गया| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Mar 2023

    शहर में तो दुकानों में बट गया!

    इक इश्क़ नाम का जो परिंदा ख़ला में था, उतरा जो शहर में तो दुकानों में बट गया| निदा फ़ाज़ली

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