-
‘मीर’ का दीवान यहाँ भी है वहाँ भी!
उठता है दिल-ओ-जाँ से धुआँ दोनों तरफ़ ही, ये ‘मीर’ का दीवान यहाँ भी है वहाँ भी| निदा फ़ाज़ली
-
खेल का मैदान यहाँ भी है वहाँ भी!
रहमान की रहमत हो कि भगवान की मूरत, हर खेल का मैदान यहाँ भी है वहाँ भी| निदा फ़ाज़ली
-
इंसान परेशान यहाँ भी है वहाँ भी!
हिन्दू भी सुकूँ से है मुसलमाँ भी सुकूँ से, इंसान परेशान यहाँ भी है वहाँ भी| निदा फ़ाज़ली
-
दरिंदों के फ़क़त नाम अलग हैं!
ख़ूँ-ख़्वार दरिंदों के फ़क़त नाम अलग हैं, हर शहर बयाबान यहाँ भी है वहाँ भी| निदा फ़ाज़ली
-
हैवान यहाँ भी है वहाँ भी!
इंसान में हैवान यहाँ भी है वहाँ भी, अल्लाह निगहबान यहाँ भी है वहाँ भी| निदा फ़ाज़ली
-
लहू तो तीर कमानों में बट गया!
ख़बरों ने की मुसव्वरी ख़बरें ग़ज़ल बनीं, ज़िंदा लहू तो तीर कमानों में बट गया| निदा फ़ाज़ली
-
चंद मचानों में बट गया!
हैं ताक में शिकारी निशाना हैं बस्तियाँ, आलम तमाम चंद मचानों में बट गया| निदा फ़ाज़ली
-
वो चंद मकानों में बट गया!
जब तक था आसमान में सूरज सभी का था, फिर यूँ हुआ वो चंद मकानों में बट गया| निदा फ़ाज़ली
-
वक़्त गेहूँ के दानों में बट गया!
पहले तलाशा खेत फिर दरिया की खोज की, बाक़ी का वक़्त गेहूँ के दानों में बट गया| निदा फ़ाज़ली
-
शहर में तो दुकानों में बट गया!
इक इश्क़ नाम का जो परिंदा ख़ला में था, उतरा जो शहर में तो दुकानों में बट गया| निदा फ़ाज़ली