-
मेरा नशा भी उतर गया!
अच्छा हुआ कि मेरा नशा भी उतर गया, तेरी कलाई से ये कड़ा भी उतर गया| मुनव्वर राना
-
मीत, तुम जगते रहना!
आज एक बार फिर से मैं हिन्दी के सुरीले गीतकार श्री बालस्वरूप राही जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| राही जी के कुछ गीत मैंने पहले भी शेयर किए हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह गीत – गाऊँ जब तक गीत मीत, तुम जगते रहनातुम मूंदोगे पलक तमिस्रा…
-
सर झुका के गुज़रने लगा हूँ मैं!
दिल्ली कहाँ गईं तिरे कूचों की रौनक़ें, गलियों से सर झुका के गुज़रने लगा हूँ मैं| जाँ निसार अख़्तर
-
प्यार से डरने लगा हूँ मैं!
इतनों का प्यार मुझ से सँभाला न जाएगा, लोगो तुम्हारे प्यार से डरने लगा हूँ मैं| जाँ निसार अख़्तर
-
काएनात बन के उभरने लगा हूँ मैं!
ये मेहर-ओ-माह अर्ज़-ओ-समा मुझ में खो गए, इक काएनात बन के उभरने लगा हूँ मैं| जाँ निसार अख़्तर
-
मेरा सुधरना मुहाल था!
ऐ चश्म-ए-यार मेरा सुधरना मुहाल था, तेरा कमाल है कि सुधरने लगा हूँ मैं| जाँ निसार अख़्तर
-
आज बिखरने लगा हूँ मैं!
हर आन टूटते ये अक़ीदों* के सिलसिले, लगता है जैसे आज बिखरने लगा हूँ मैं|*Faith जाँ निसार अख़्तर
-
फ़र्ज़ भी करने लगा हूँ मैं!
पहले हक़ीक़तों ही से मतलब था और अब, एक आध बात फ़र्ज़ भी करने लगा हूँ मैं| जाँ निसार अख़्तर
-
हद से गुज़रने लगा हूँ मैं!
ऐ दर्द-ए-इश्क़ तुझसे मुकरने लगा हूँ मैं, मुझको संभाल हद से गुज़रने लगा हूँ मैं| जाँ निसार अख़्तर
-
अपने आपको तन्हा किया न जाए!
हम हैं तिरा ख़याल है तेरा जमाल है, इक पल भी अपने आपको तन्हा किया न जाए| जाँ निसार अख़्तर