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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 12th Mar 2023

    अब्र तो बारह-मास होता है!

    गो बरसती नहीं सदा आँखें, अब्र तो बारह-मास होता है| गुलज़ार

  • 12th Mar 2023

    दर्द चेहरा-शनास होता है!

    आँखें पहचानती हैं आँखों को, दर्द चेहरा-शनास होता है| गुलज़ार

  • 12th Mar 2023

    सूरज की पेशी!

    अपने समय में हिन्दी के एक प्रमुख कवि और बच्चों की पत्रिका ‘पराग’ के संपादक रहे स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की एक रचना आज शेयर कर रहा हूँ| नंदन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी का यह नवगीत – आँखों में रंगीन नज़ारेसपने…

  • 11th Mar 2023

    लिबास-ए-हया भी उतर गया!

    पहले भी बे-लिबास थे इतने मगर न थे, अब जिस्म से लिबास-ए-हया भी उतर गया| मुनव्वर राना

  • 11th Mar 2023

    मेरा गला भी उतर गया!

    सच बोलने में नश्शा कई बोतलों का था, बस ये हुआ कि मेरा गला भी उतर गया| मुनव्वर राना

  • 11th Mar 2023

    ख़ाली हाथ तवा भी उतर गया!

    वो मुफ़्लिसी के दिन भी गुज़ारे हैं मैंने जब, चूल्हे से ख़ाली हाथ तवा भी उतर गया| मुनव्वर राना

  • 11th Mar 2023

    रंग-ए-हिना भी उतर गया!

    रो-धो के वो भी हो गया ख़ामोश एक रोज़, दो-चार दिन में रंग-ए-हिना भी उतर गया| मुनव्वर राना

  • 11th Mar 2023

    आरज़ू में परेशाँ है ज़िंदगी!

    बेकस की आरज़ू में परेशाँ है ज़िंदगी, अब तो फ़सील-ए-जाँ से दिया भी उतर गया| मुनव्वर राना

  • 11th Mar 2023

    टूट जाऊँगा जो ज़रा भी उतर गया!

    रुख़्सत का वक़्त है यूँही चेहरा खिला रहे, मैं टूट जाऊँगा जो ज़रा भी उतर गया| मुनव्वर राना

  • 11th Mar 2023

    क़र्ज़ मिरा भी उतर गया!

    वो मुतमइन बहुत है मिरा साथ छोड़कर, मैं भी हूँ ख़ुश कि क़र्ज़ मिरा भी उतर गया| मुनव्वर राना

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