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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 13th Mar 2023

    जो रुस्वा न हो ज़माने में!

    वो कोई रंग है जो उड़ न जाए ऐ गुल-ए-तर, वो कोई बू है जो रुस्वा न हो ज़माने में| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 13th Mar 2023

    दर्द भरा था मिरे फ़साने में!

    ‘फ़िराक़’ दौड़ गई रूह सी ज़माने में, कहाँ का दर्द भरा था मिरे फ़साने में| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 13th Mar 2023

    नाम उछलता रहा ज़माने में!

    कमी न की तिरे वहशी ने ख़ाक उड़ाने में, जुनूँ का नाम उछलता रहा ज़माने में| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 13th Mar 2023

    गोरी बैठी छत्त पर!

    हास्य व्यंग्य में छंदबद्ध कविता के दिग्गज कवि स्वर्गीय ओमप्रकाश आदित्य जी की एक रचना आज शेयर कर रहा हूँ| आदित्य जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| इस रचना का प्रसंग है कि एक नवयुवती छज्जे पर उदास बैठी है। उसकी मुख-मुद्रा देखकर लग रहा है कि जैसे वह छत से…

  • 12th Mar 2023

    हम ज़मीं को अगर ज़मीं कहते!

    आपके पाँव फिर कहाँ पड़ते, हम ज़मीं को अगर ज़मीं कहते| गुलज़ार

  • 12th Mar 2023

    हम किसे आप सा हसीं कहते!

    चाँद होता न आसमाँ पे अगर, हम किसे आप सा हसीं कहते| गुलज़ार

  • 12th Mar 2023

    आप हैं इसलिए नहीं कहते!

    हम तो कितनों को मह-जबीं कहते, आप हैं इसलिए नहीं कहते| गुलज़ार

  • 12th Mar 2023

    साँप मौक़ा-शनास होता है!

    डस ही लेता है सबको इश्क़ कभी, साँप मौक़ा-शनास होता है| गुलज़ार

  • 12th Mar 2023

    दिल का लिबास होता है!

    ज़ख़्म कहते हैं दिल का गहना है, दर्द दिल का लिबास होता है| गुलज़ार

  • 12th Mar 2023

    नीचे नाख़ुन के मास होता है!

    छाल पेड़ों की सख़्त है लेकिन, नीचे नाख़ुन के मास होता है| गुलज़ार

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