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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th Mar 2023

    प्यार को मायूब समझते होंगे!

    भूल कर अपना ज़माना ये ज़माने वाले, आज के प्यार को मायूब* समझते होंगे|*ग़लत बशीर बद्र

  • 14th Mar 2023

    मोहब्बत की ज़बाँ ख़ुशबू है!

    मैं समझता था मोहब्बत की ज़बाँ ख़ुशबू है, फूल से लोग उसे ख़ूब समझते होंगे| बशीर बद्र

  • 14th Mar 2023

    मिरा महबूब समझते होंगे!

    इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी, लोग तुझको मिरा महबूब समझते होंगे| बशीर बद्र

  • 14th Mar 2023

    कहते हैं किसे ख़ूब समझते होंगे!

    वो ग़ज़ल वालों का उस्लूब* समझते होंगे, चाँद कहते हैं किसे ख़ूब समझते होंगे|*Style बशीर बद्र

  • 14th Mar 2023

    घट!

    आज हिन्दी साहित्य के एक विराट व्यक्तित्व स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इस कविता में एक तरह से एक मटका अपनी मालकिन- पनिहारिन से अपने मनोभाव व्यक्त कर रहा है| अज्ञेय जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है अज्ञेय जी…

  • 13th Mar 2023

    ख़्वाब ये देखा है क़ैद-ख़ाने में!

    हमीं हैं गुल हमीं बुलबुल हमीं हवा-ए-चमन, ‘फ़िराक़’ ख़्वाब ये देखा है क़ैद-ख़ाने में| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 13th Mar 2023

    तेरी याद में हों या तुझे भुलाने में!

    ग़रज़ कि काट दिए ज़िंदगी के दिन ऐ दोस्त, वो तेरी याद में हों या तुझे भुलाने में| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 13th Mar 2023

    दास्ताँ थी निहाँ तेरे आँख उठाने में!

    उसी की शरह है ये उठते दर्द का आलम, जो दास्ताँ थी निहाँ तेरे आँख उठाने में| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 13th Mar 2023

    जान पड़ गई हसरत भरे फ़साने में!

    किसी की हालत-ए-दिल सुन के उठ गईं आँखें, कि जान पड़ गई हसरत भरे फ़साने में| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 13th Mar 2023

    हासिल यही है जलने का!

    बयान-ए-शम्अ है हासिल यही है जलने का, फ़ना की कैफ़ियतें देख झिलमिलाने में| फ़िराक़ गोरखपुरी

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