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मेरा घर बताता है!
न कोई ओहदा न डिग्री न नाम की तख़्ती, मैं रह रहा हूँ यहाँ मेरा घर बताता है| वसीम बरेलवी
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शब्दों की पुकार!
लीजिए आज एक बार फिर से प्रस्तुत है हिन्दी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की एक रचना| जैसा कि मैंने पहले भी उल्लेख किया है कि आम जनता के बीच दुष्यंत जी को आपातकाल में लिखी गईं उनकी विरोध का स्वर गुंजाने वाली ग़ज़लों के कारण मिली थी लेकिन वे हर दृष्टि से…