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ठिकाने के दिन या!
‘फ़िराक़’ अपनी क़िस्मत में शायद नहीं थे,ठिकाने के दिन या ठिकाने की रातें| फ़िराक़ गोरखपुरी
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मुस्कुराने की रातें!
पुर-असरार सी मेरी अर्ज़-ए-तमन्ना,वो कुछ ज़ेर-ए-लब मुस्कुराने की रातें| फ़िराक़ गोरखपुरी
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हर सुब्ह-ए-रुख़्सत!
मुझे याद है तेरी हर सुब्ह-ए-रुख़्सत,मुझे याद हैं तेरे आने की रातें| फ़िराक़ गोरखपुरी
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आसमां पे है खुदा!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज एक बार फिर मैं फिल्म- फिर सुबह होगी के लिए मुकेश जी का गाया एक प्रसिद्ध गीत शेयर कर रहा हूँ- आसमां पे है खुदा और ज़मीं पे हम आजकल वो इस तरफ देखता है कम! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******