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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 21st Apr 2023

    सुनाई है वहीं से हमने!

    जिस जगह पहले-पहल नाम तिरा आता है, दास्ताँ अपनी सुनाई है वहीं से हमने| जाँ निसार अख़्तर

  • 21st Apr 2023

    दीवाना बने फिरते थे!

    वो भी क्या दिन थे कि दीवाना बने फिरते थे, सुन लिया था तिरे बारे में कहीं से हमने| जाँ निसार अख़्तर

  • 21st Apr 2023

    शिकनों को चुना!

    हौसला खो न दिया तेरी नहीं से हमने, कितनी शिकनों को चुना तेरी जबीं से हमने| जाँ निसार अख़्तर

  • 21st Apr 2023

    खंडहर के प्रति!

    आज एक बार फिर से प्रस्तुत कर रहा हूँ , छायावाद युग के एक प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की एक कविता, जिन्होंने हमें ‘राम की शक्ति पूजा’ जैसी कुछ अमर रचनाएं हमें दी हैं|  निराला जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी…

  • 20th Apr 2023

    करता नहीं हूँ मैं!

    उन कामों की बनाता हूँ फ़िहरिस्त बार बार, जो काम मुझको करने हैं करता नहीं हूँ मैं|    राजेश रेड्डी

  • 20th Apr 2023

    सँवरता नहीं हूँ मैं!

    पहचान ही न पाऊँ ख़ुद अपने ही अक्स को, इतना भी आइने में सँवरता नहीं हूँ मैं| राजेश रेड्डी

  • 20th Apr 2023

    बाज़ार-ए-आरज़ू से

    शर्मिंदा अपनी जेब को करता नहीं हूँ मैं, बाज़ार-ए-आरज़ू से गुज़रता नहीं हूँ मैं| राजेश रेड्डी

  • 20th Apr 2023

    नसीबों की तरह तू!

    मुँह फेर के जाना है तुझे जा तिरी मर्ज़ी, मत रूठ मगर मुझ से नसीबों की तरह तू| राजेश रेड्डी

  • 20th Apr 2023

    उमीदों की तरह तू!

    चाहा था बहुत मैंने भुला दूँ तुझे लेकिन, जाता ही नहीं दिल से उमीदों की तरह तू| राजेश रेड्डी

  • 20th Apr 2023

    मिरी नींदों की तरह तू!

    सुख-चैन मिरा लूटने वाले आ किसी दिन, मुझको भी चुरा ले मिरी नींदों की तरह तू| राजेश रेड्डी

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