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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 26th Apr 2023

    इक शाम के साए तले!

    इक शाम के साए तले बैठे रहे वो देर तक, आँखों से की बातें बहुत मुँह से कहा कुछ भी नहीं| बशीर बद्र

  • 26th Apr 2023

    लिखा कुछ भी नहीं!

    जिस पर हमारी आँख ने मोती बिछाए रात भर, भेजा वही काग़ज़ उसे हमने लिखा कुछ भी नहीं| बशीर बद्र

  • 26th Apr 2023

    तेरी ख़ता कुछ भी नहीं

    सोचा तुझे देखा तुझे चाहा तुझे पूजा तुझे, मेरी ख़ता मेरी वफ़ा तेरी ख़ता कुछ भी नहीं| बशीर बद्र

  • 26th Apr 2023

    तेरे सिवा कुछ भी नहीं!

    सोचा नहीं अच्छा बुरा देखा सुना कुछ भी नहीं, माँगा ख़ुदा से रात दिन तेरे सिवा कुछ भी नहीं| बशीर बद्र

  • 26th Apr 2023

    उर पर पत्थर धर दो!

    एक बार फिर से मैं आज हिन्दी गीत जगत के विराट व्यक्तित्व स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| एक समय था जब बच्चन जी ने गीत के श्रोताओं को दीवाना बना दिया था और दूर-दूर से लोग उनका काव्य पाठ सुनने के लिए जाते थे| बच्चन जी की कुछ रचनाएं…

  • 25th Apr 2023

    वैसी तो दुनिया नहीं!

    जैसी होनी चाहिए थी वैसी तो दुनिया नहीं, दुनिया-दारी भी ज़रूरत है चलो यूँ ही सही|     निदा फ़ाज़ली

  • 25th Apr 2023

    आदमिय्यत है चलो!

    भूल थी अपनी फ़रिश्ता आदमी में ढूँडना, आदमी में आदमिय्यत है चलो यूँ ही सही| निदा फ़ाज़ली

  • 25th Apr 2023

    लिबासों की तरह!

    मैले हो जाते हैं रिश्ते भी लिबासों की तरह, दोस्ती हर दिन की मेहनत है चलो यूँ ही सही| निदा फ़ाज़ली

  • 25th Apr 2023

    होगा कहीं उसकी तरह

    वो नहीं तो कोई तो होगा कहीं उसकी तरह, जिस्म में जब तक हरारत है चलो यूँ ही सही| निदा फ़ाज़ली

  • 25th Apr 2023

    बेवफ़ा वो हैं तो क्या!

    हम कहाँ के देवता हैं बेवफ़ा वो हैं तो क्या, घर में कोई घर की ज़ीनत है चलो यूँ ही सही| निदा फ़ाज़ली

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