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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 10th Dec 2025

    कहाँ की बात करते हो!

    आज फिर से अपना एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा। कहाँ की बात करते होकहाँ मेले लगे हैं अबस्वजन तो अब नहीं दिखतेपराए ही सगे हैं अब। खुशी के भव्य आयोजनअमीरी के प्रदर्शन हैंमगर अपनत्व का इनमेंनहीं दिखता कोई कण है। करो व्यवहार सबसे तौलकरक्या दिया, क्या पाया अजी व्यवहार…

  • 9th Dec 2025

    वादा-ए-शब याद!

    दिन गुज़ारा था बड़ी मुश्किल से,फिर तिरा वादा-ए-शब याद आया| नासिर काज़मी

  • 9th Dec 2025

    तू मुसीबत में अजब!

    आज मुश्किल था सँभलना ऐ दोस्त, तू मुसीबत में अजब याद आया| नासिर काज़मी

  • 9th Dec 2025

    वो तिरी याद थी!

    दिल धड़कने का सबब याद आया,वो तिरी याद थी अब याद आया| नासिर काज़मी

  • 9th Dec 2025

    फिर ये दरिया !

    आओ कुछ देर रो ही लें ‘नासिर’,फिर ये दरिया उतर न जाए कहीं| नासिर काज़मी

  • 9th Dec 2025

    जी जलाता हूँ और!

    जी जलाता हूँ और सोचता हूँ,राएगाँ ये हुनर न जाए कहीं| नासिर काज़मी

  • 9th Dec 2025

    उम्र भर न जाए कहीं!

    आरज़ू है कि तू यहाँ आए,और फिर उम्र भर न जाए कहीं| नासिर काज़मी

  • 9th Dec 2025

    चंदन सा बदन, चंचल चितवन!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज में अपने स्वर में मुकेश जी द्वारा गाया गया फिल्म- सरस्वतीचंद्र का यह प्रसिद्ध गीत शेयर कर रहा हूँ- चंदन सा बदन, चंचल चितवनधीरे से तेरा ये मुस्काना, मुझे दोष न देना जग वालोंहो जाऊं अगर मैं दीवाना। आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद । *****

  • 9th Dec 2025

    खेल ये बाज़ार का!

    प्रस्तुत है आज का यह गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- खेल ये बाज़ार का, कुछ दिनबहुत अच्छा लगा! खूब बिके हम, खूब खरीदा, लोगों को, सामानों को, गोदामों में जमा कियासामानों को, परिधानों कोकिंतु जब होने लगा ये सच, हमें धक्का लगा। मिथ्या है ये जगत यही तो सुनते हम हैं आए चालें ऊपर…

  • 9th Dec 2025

    गधे ही गधे हैं!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं स्वर्गीय ओम प्रकाश आदित्य जी की एक प्रसिद्ध हास्य कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ- इधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैं जिधर देखता हूँ, गधे ही गधे हैं। आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद। *****

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