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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 3rd May 2023

    सफ़ीना पहुँचा है!

    मिरा तो सिर्फ़ भँवर तक सफ़ीना पहुँचा है, तुझे तो डूबने वालों ने भी पुकारा नहीं| क़तील शिफ़ाई 

  • 3rd May 2023

    दामन कभी पसारा नहीं

    ये इल्तिफ़ात* की भीक अपने पास रहने दे, तिरे फ़क़ीर ने दामन कभी पसारा नहीं| *Kindness क़तील शिफ़ाई 

  • 3rd May 2023

    क्या घटा के सिवा!

    तुम्हारे ज़िक्र से याद आए क्या घटा के सिवा, हमारे पास कोई और इस्तिआरा* नहीं| *Example क़तील शिफ़ाई

  • 3rd May 2023

    कौन भुलाता है!

    ख़ुशी से कौन भुलाता है अपने प्यारों को, क़ुसूर इसमें ज़माने का है तुम्हारा नहीं| क़तील शिफ़ाई 

  • 3rd May 2023

    काली सलाखों में बंद!

    आज एक बार फिर से मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ गीतकार श्री सोम ठाकुर जी का  एक गीत शेयर कर रहा हूँ|  सोम ठाकुर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत  – रात, में घूमता रहा काली सलाखों में बंदकोई…

  • 2nd May 2023

    और कोई चारा नहीं!

     अगरचे मुझ को जुदाई तिरी गवारा नहीं, सिवाए इसके मगर और कोई चारा नहीं| क़तील शिफ़ाई 

  • 2nd May 2023

    तारा है इन दिनों!

    तुम आ सको तो शब को बढ़ा दूँ कुछ और भी, अपने कहे में सुब्ह का तारा है इन दिनों| क़तील शिफ़ाई 

  • 2nd May 2023

    वो पहली सी रौशनी!

    शम्ओं‘ में अब नहीं है वो पहली सी रौशनी, क्या वाक़ई वो अंजुमन-आरा है इन दिनों| क़तील शिफ़ाई 

  • 2nd May 2023

    तिरी यादों में खो गया!

    ये दिल ज़रा सा दिल तिरी यादों में खो गया, ज़र्रे को आँधियों का सहारा है इन दिनों| क़तील शिफ़ाई 

  • 2nd May 2023

    किनारा है इन दिनों!

    हर सैल-ए-अश्क साहिल-ए-तस्कीं है आज-कल, दरिया की मौज मौज किनारा है इन दिनों| क़तील शिफ़ाई 

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