-
सफ़ीना पहुँचा है!
मिरा तो सिर्फ़ भँवर तक सफ़ीना पहुँचा है, तुझे तो डूबने वालों ने भी पुकारा नहीं| क़तील शिफ़ाई
-
दामन कभी पसारा नहीं
ये इल्तिफ़ात* की भीक अपने पास रहने दे, तिरे फ़क़ीर ने दामन कभी पसारा नहीं| *Kindness क़तील शिफ़ाई
-
क्या घटा के सिवा!
तुम्हारे ज़िक्र से याद आए क्या घटा के सिवा, हमारे पास कोई और इस्तिआरा* नहीं| *Example क़तील शिफ़ाई
-
कौन भुलाता है!
ख़ुशी से कौन भुलाता है अपने प्यारों को, क़ुसूर इसमें ज़माने का है तुम्हारा नहीं| क़तील शिफ़ाई
-
काली सलाखों में बंद!
आज एक बार फिर से मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ गीतकार श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम ठाकुर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत – रात, में घूमता रहा काली सलाखों में बंदकोई…
-
तारा है इन दिनों!
तुम आ सको तो शब को बढ़ा दूँ कुछ और भी, अपने कहे में सुब्ह का तारा है इन दिनों| क़तील शिफ़ाई
-
वो पहली सी रौशनी!
शम्ओं‘ में अब नहीं है वो पहली सी रौशनी, क्या वाक़ई वो अंजुमन-आरा है इन दिनों| क़तील शिफ़ाई
-
तिरी यादों में खो गया!
ये दिल ज़रा सा दिल तिरी यादों में खो गया, ज़र्रे को आँधियों का सहारा है इन दिनों| क़तील शिफ़ाई
-
किनारा है इन दिनों!
हर सैल-ए-अश्क साहिल-ए-तस्कीं है आज-कल, दरिया की मौज मौज किनारा है इन दिनों| क़तील शिफ़ाई