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ता’बीर पे रोना आया!
क्या हसीं ख़्वाब मोहब्बत ने दिखाया था हमें, खुल गई आँख तो ता’बीर पे रोना आया| शकील बदायूनी
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ज़ंजीर पे रोना आया!
इश्क़ की क़ैद में अब तक तो उमीदों पे जिए, मिट गई आस तो ज़ंजीर पे रोना आया| शकील बदायूनी
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तस्वीर पे रोना आया!
आज फिर गर्दिश-ए-तक़दीर पे रोना आया, दिल की बिगड़ी हुई तस्वीर पे रोना आया| शकील बदायूनी
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भर दिया जाम!
प्रसिद्ध हिन्दी गीत कवि और संपादक श्री बालस्वरूप राही जी का एक गीत मैं आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| राही जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह गीत – भर दिया जाम जब तुमने अपने हाथों सेप्रिय! बोलो, मैं इंकार करूँ भी…