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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 27th May 2023

    ये एक शब की!

    ये एक शब की मुलाक़ात भी ग़नीमत है, किसे है कल की ख़बर थोड़ी दूर साथ चलो| अहमद फ़राज़

  • 27th May 2023

    तुम्हें भी होश नहीं!

    नशे में चूर हूँ मैं भी तुम्हें भी होश नहीं, बड़ा मज़ा हो अगर थोड़ी दूर साथ चलो| अहमद फ़राज़

  • 27th May 2023

    ये जानता हूँ मगर!

    तमाम उम्र कहाँ कोई साथ देता है, ये जानता हूँ मगर थोड़ी दूर साथ चलो| अहमद फ़राज़

  • 27th May 2023

    थोड़ी दूर साथ चलो!

    कठिन है राहगुज़र थोड़ी दूर साथ चलो, बहुत कड़ा है सफ़र थोड़ी दूर साथ चलो| अहमद फ़राज़

  • 27th May 2023

    प्यार!

    आज मैं प्रसिद्ध हिन्दी कवि स्वर्गीय दूधनाथ सिंह जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ|  उनकी कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय दूधनाथ सिंह जी की यह कविता – स्तब्ध निःशब्दता में कहीं एक पत्ता खड़कता है।अंधेरे की खोह हलचल के प्रथम सीमान्त पर चुप–मुस्कुराती है।रोशनी की…

  • 26th May 2023

    दीदार-ए-यार आ गया

    आज यूँ मौज-दर-मौज ग़म थम गया इस तरह ग़म-ज़दों को क़रार आ गया, जैसे ख़ुश-बू-ए-ज़ुल्फ़-ए-बहार आ गई जैसे पैग़ाम-ए-दीदार-ए-यार आ गया| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 26th May 2023

    कब हमारे थे!

    उम्र-ए-जावेद की दुआ करते, ‘फ़ैज़’ इतने वो कब हमारे थे| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 26th May 2023

    दामन में आ गिरे सारे

    मेरे दामन में आ गिरे सारे, जितने तश्त-ए-फ़लक में तारे थे| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 26th May 2023

    दिल पे वारे थे!

    जब वो लाल-ओ-गुहर हिसाब किए, जो तिरे ग़म ने दिल पे वारे थे| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 26th May 2023

    और भी सहारे थे!

    तेरे क़ौल-ओ-क़रार से पहले, अपने कुछ और भी सहारे थे| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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