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प्रेम प्रताप!
आज मैं हिन्दी आलोचना के शिखर पुरुष स्वर्गीय रामचन्द्र शुक्ल जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| नीरज जी की कविता मैं आज पहली बार शेयर कर रहा हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामचन्द्र शुक्ल जी की यह कविता – जग के सबही काज प्रेम ने सहज बनाये,जीवन सुखमय किया शांति के स्रोत…