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ये खेल क्या है!
आज मैं प्रसिद्ध शायर और भारतीय फिल्मों में अनेक लोकप्रिय गीतों की सौगात देने वाले श्री जावेद अख़्तर जी की एक नज़्म प्रस्तुत कर रहा हूँ| जावेद जी की बहुत सी रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री जावेद अख़्तर जी की यह रचना – मिरे मुख़ालिफ़ ने चाल…
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अब ख़ुद से बेज़ारी है!
जो चेहरा देखा वो तोड़ा नगर नगर वीरान किए, पहले औरों से ना-ख़ुश थे अब ख़ुद से बे-ज़ारी है| निदा फ़ाज़ली
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लालपरी ना फूलकली
ऐब नहीं है इसमें कोई लाल-परी ना फूल-कली, ये मत पूछो वो अच्छा है या अच्छी नादारी है| निदा फ़ाज़ली
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कुछ अपनी अय्यारी है!
औरों जैसे होकर भी हम बा-इज़्ज़त हैं बस्ती में, कुछ लोगों का सीधा-पन है कुछ अपनी अय्यारी है| निदा फ़ाज़ली
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किसी को उदास देखकर!
आज एक बार फिर से मैं भारतीय फिल्मों पर अपने गीतों के माध्यम से अमिट छाप छोड़ने वाले प्रमुख शायर और कवि स्वर्गीय साहिर लुधियानवी जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ| साहिर जी की बहुत सी रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय साहिर लुधियानवी जी की यह…
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किसी का प्यार भी रख!
पहाड़ गूँजें नदी गाए ये ज़रूरी है, सफ़र कहीं का हो दिल में किसी का प्यार भी रख| निदा फ़ाज़ली