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शतरंज खेलो और प्रेम करो!
श्रेष्ठ कवियों की कविताएं शेयर करने के क्रम में मैं अभी अज्ञेय जी द्वारा संपादित सप्तकों में शामिल श्रेष्ठ कवियों की कविताएं शेयर कर रहा हूँ और इसके अंतर्गत आज मैं चौथा सप्तक में शामिल एक कवि श्री राजकुमार कुंभज जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री राजकुमार कुंभज…
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उसको भूल जाऊँगी!
जवाज़* ढूँड रहा था नई मोहब्बत का, वो कह रहा था कि मैं उसको भूल जाऊँगी| *Justification परवीन शाकिर
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राख उठाऊँगी!
बिछा दिया था गुलाबों के साथ अपना वजूद, वो सो के उट्ठे तो ख़्वाबों की राख उठाऊँगी| परवीन शाकिर
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अकेले में गुनगुनाऊँगी!
अब उसका फ़न तो किसी और से हुआ मंसूब, मैं किसकी नज़्म अकेले में गुनगुनाऊँगी| परवीन शाकिर
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दोस्त जल्दी मिलो!
अज्ञेय जी द्वारा संपादित सप्तकों में शामिल श्रेष्ठ कवियों की कविताएं शेयर करने के क्रम मे आज मैं चौथा सप्तक में शामिल एक कवि स्वर्गीय अवधेश कुमार जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय अवधेश कुमार जी की यह कविता – सुबह–एक हल्की-सी चीख़ की तरहबहुत पीली और उदास…