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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Aug 2023

    चढ़ते उतरते रहते हैं!

    बस एक वहशत-ए-मंज़िल है और कुछ भी नहीं, कि चंद सीढ़ियाँ चढ़ते उतरते रहते हैं| गुलज़ार

  • 5th Aug 2023

    दिन पलटते रहते हैं!

    खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं, हवा चले न चले दिन पलटते रहते हैं| गुलज़ार

  • 5th Aug 2023

    आत्म छलना-2

    श्रेष्ठ कवियों की कविताएं शेयर करने के क्रम में मैं अभी अज्ञेय जी द्वारा संपादित सप्तकों में शामिल श्रेष्ठ कवियों की कविताएं शेयर कर रहा हूँ और इसके अंतर्गत आज मैं चौथा सप्तक में शामिल एक कवि स्वर्गीय स्वदेश भारती जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| उन्होंने इस एक ही शीर्षक से की…

  • 5th Aug 2023

    ऐसी आदत होती है!

    इक कश्ती में एक क़दम ही रखते हैं, कुछ लोगों की ऐसी आदत होती है|     जावेद अख़्तर

  • 5th Aug 2023

    फ़ितरत होती है!

    अपनी महबूबा में अपनी माँ देखें, बिन माँ के लड़कों की फ़ितरत होती है| जावेद अख़्तर

  • 4th Aug 2023

    जब भी फ़ुर्सत होती है!

    तब हम दोनों वक़्त चुरा कर लाते थे, अब मिलते हैं जब भी फ़ुर्सत होती है| जावेद अख़्तर

  • 4th Aug 2023

    कहते हैं हैरत होती है!

    अक्सर वो कहते हैं वो बस मेरे हैं, अक्सर क्यूँ कहते हैं हैरत होती है| जावेद अख़्तर

  • 4th Aug 2023

    शय की क़ीमत होती है

    ग़म होते हैं जहाँ ज़ेहानत होती है, दुनिया में हर शय की क़ीमत होती है| जावेद अख़्तर

  • 4th Aug 2023

    हमने फ़ाक़े झेले थे!

    ज़ेहन ओ दिल आज भूके मरते हैं, उन दिनों हमने फ़ाक़े झेले थे| जावेद अख़्तर

  • 4th Aug 2023

    अपने सौ झमेले थे!

    ख़ुद-कुशी क्या दुखों का हल बनती, मौत के अपने सौ झमेले थे| जावेद अख़्तर

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