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हम-सफ़र हो जाएगी!
पाँव पत्थर करके छोड़ेगी अगर रुक जाइए, चलते रहिए तो ज़मीं भी हम-सफ़र हो जाएगी| राहत इंदौरी
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उदास मैं!
आज एक बार फिर से मैं साहित्य की लगभग सभी विधाओं में योगदान करने वाले प्रमुख साहित्यकार, कवि और धर्मयुग पत्रिका के यशस्वी संपादक रहे स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| भारती जी की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती…
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सौंदर्य-बोध!
आज एक बार फिर से मैं साहित्य की लगभग सभी विधाओं में योगदान करने वाले प्रमुख साहित्यकार एवं कवि श्री रामदरश मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| मिश्र जी की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री रामदरश मिश्र जी की यह कविता – सौंदर्य-बोधमानव-मन…