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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Aug 2023

    मर जाने की जल्दी थी!

    वो शाख़ों से जुदा होते हुए पत्तों पे हँसते थे, बड़े ज़िंदा-नज़र थे जिनको मर जाने की जल्दी थी| राहत इंदौरी

  • 17th Aug 2023

    जाने की जल्दी थी!

    मैं आख़िर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता, यहाँ हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी थी| राहत इंदौरी

  • 17th Aug 2023

    मगर मेरे क़बीले को!

    मैं अपनी मुट्ठियों में क़ैद कर लेता ज़मीनों को, मगर मेरे क़बीले को बिखर जाने की जल्दी थी| राहत इंदौरी

  • 17th Aug 2023

    उतर जाने की जल्दी थी

    इरादा था कि मैं कुछ देर तूफ़ाँ का मज़ा लेता, मगर बेचारे दरिया को उतर जाने की जल्दी थी| राहत इंदौरी

  • 17th Aug 2023

    घर जाने की जल्दी थी!

    उसे अब के वफ़ाओं से गुज़र जाने की जल्दी थी, मगर इस बार मुझको अपने घर जाने की जल्दी थी| राहत इंदौरी

  • 17th Aug 2023

    तल्ख़ियाँ भी लाज़मी हैं!

    तल्ख़ियाँ भी लाज़मी हैं ज़िंदगी के वास्ते, इतना मीठा बन के मत रहिए शकर हो जाएगी| राहत इंदौरी

  • 17th Aug 2023

    पनघट!

    आज फिर से मैं प्रसिद्ध हिन्दी व्यंग्यकार और कवि स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ त्यागी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| त्यागी जी की कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ त्यागी जी की यह कविता – ग्राम अलका अप्सराएँपनघट पर नीर भरे! सुन्दर सजीले अंगअचल हिले खुले पंखवस्त्र…

  • 16th Aug 2023

    दर्द-ए-सर हो जाएगी!

    तुमने ख़ुद ही सर चढ़ाई थी सो अब चक्खो मज़ा, मैं न कहता था कि दुनिया दर्द-ए-सर हो जाएगी| राहत इंदौरी

  • 16th Aug 2023

    साथ रहती ‘उम्र-भर!

    ज़िंदगी भी काश मेरे साथ रहती ‘उम्र-भर, ख़ैर अब जैसे भी होनी है बसर हो जाएगी| राहत इंदौरी

  • 16th Aug 2023

    तो सहर हो जाएगी!

    जुगनुओं को साथ लेकर रात रौशन कीजिए, रास्ता सूरज का देखा तो सहर हो जाएगी| राहत इंदौरी

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