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बे तिरे जहन्नम है!
ऐ मोहब्बत तू इक अज़ाब* सही, ज़िंदगी बे तिरे जहन्नम है| *Suffering फ़िराक़ गोरखपुरी
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ज़िंदगी का मातम है!
ये भी नज़्म-ए-हयात* है कोई, ज़िंदगी ज़िंदगी का मातम है| *SongOfLife फ़िराक़ गोरखपुरी
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फिर छूटेगा लंदन!
पिछली दो बार की तरह एक बार फिर लंदन प्रवास का अंत होने को है, यहाँ रहते हुए अंतिम सप्ताहांत भी निकल गया, इस रविवार को एक बार फिर से हम भारतीयों के प्रिय स्थान साउथ हॉल गए, वहाँ कुछ खरीदारी की और मनपसंद खाना खाया| गोवा लौटने के बाद यहाँ का प्रवास फिर से…
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इंक़लाब-ए-पैहम है!
इसमें ठहराव या सुकून कहाँ, ज़िंदगी इंक़लाब-ए-पैहम* है| *Continuous struggle फ़िराक़ गोरखपुरी
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दिवाना हो गया है!
किसी ने देखे हैं पतझड़ में फूल खिलते हुए, दिल अपनी ख़ुश-नज़री में दिवाना हो गया है| इरफ़ान सिद्दीक़ी
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परिंद अपने परों का!
फ़ज़ा-ए-शौक़ में उसकी बिसात ही क्या थी, परिंद अपने परों का निशाना हो गया है| इरफ़ान सिद्दीक़ी
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झोंका बहाना हो गया है
हमें तो ख़ैर बिखरना ही था कभी न कभी, हवा-ए-ताज़ा का झोंका बहाना हो गया है| इरफ़ान सिद्दीक़ी