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वो निग़ाहें सलीब हैं!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की एक ग़ज़ल के कुछ शेर प्रस्तुत कर रहा हूँ- वो निग़ाहें सलीब हैं, हम बहुत बदनसीब हैं! आशा है आपको यह पसंद आएंगे,धन्यवाद। ********
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चराग़ ओ आफ़ताब ग़ुम!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं सुदर्शन फ़ाकिर जी की लिखी यह ग़ज़ल अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसे जगजीत सिंह जी ने बहुत मोहक अंदाज़ में गाया है- चराग़ ओ आफ़ताब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद। *******
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इस तरह तो!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ गीतकार श्री बालस्वरूप राही जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। राही जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह गीत– इस तरह तो दर्द घट सकता नहींइस तरह तो वक़्त कट सकता नहींआस्तीनों से…
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इन्हें प्रणाम करो -3
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैंने स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी की इस व्यंग्य कविता के दो भाग पहले शेयर किए हैं, आज कविता का तीसरा और अंतिम भाग प्रस्तुत कर रहा हूँ- इन्हें प्रणाम करो ये बड़े महान हैं-3 आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ********
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जिस गली में तेरा घर न हो बालमा!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं फिल्म- ‘कटी पतंग’ के लिए मुकेश जी का गाया गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसे आनंद बक्षी जी ने लिखा था और राहुल देव बर्मन जी ने इसका संगीत तैयार किया था- जिस गली में तेरा घर न हो बालमा, उस गली से हमें…
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एक पुराना दुख- पुरानी पोस्ट
अपनी एक बहुत पुरानी पोस्ट फिर से प्रस्तुत कर रहा हूँ। इस शहर में वो कोई बारात हो या वारदात अब किसी भी बात पर खुलती नहीं हैं खिड़कियां । (दुष्यंत कुमार)लेकिन ये ब्लॉग लिखने का उद्देश्य तो खिड़कियों को खोलने का प्रयास करना ही है। एक पुराना अनुभव साझा कर रहा हूँ, उससे पहले…