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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 21st Nov 2025

    आँसू कभी शीशा है!

    ग़म वज्ह-ए-फ़िगार-ए-दिल ग़म वज्ह-ए-क़रार-ए-दिल,आँसू कभी शीशा है आँसू कभी पानी है| बशीर बद्र

  • 21st Nov 2025

    चाँद से मुँह मोड़ा!

    जिस संग पे नज़रें कीं ख़ुर्शीद-ए-हक़ीक़त है,जिस चाँद से मुँह मोड़ा पत्थर की कहानी है| बशीर बद्र

  • 21st Nov 2025

    ठहरा हुआ दरिया है!

    दिल से जो छटे बादल तो आँख में सावन है,ठहरा हुआ दरिया है बहता हुआ पानी है| बशीर बद्र

  • 21st Nov 2025

    पत्थर की हिफ़ाज़त में!

    इक ज़ेहन-ए-परेशाँ में ख़्वाब-ए-ग़ज़लिस्ताँ है,पत्थर की हिफ़ाज़त में शीशे की जवानी है| बशीर बद्र

  • 21st Nov 2025

    बस यही अपराध मैं हर बार करता हूँ!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में मुकेश जी का गाया यह प्रसिद्ध गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे नीरज जी ने लिखा था- बस यही अपराध मैं हर बार करता हूँ,आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ। आशा है आपको पसंद आएगा।धन्यवाद ।

  • 21st Nov 2025

    ख़ुद राह बना लेगा!

    पत्थर के जिगर वालो ग़म में वो रवानी है,ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है| बशीर बद्र

  • 21st Nov 2025

    केवल तुम – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…

  • 20th Nov 2025

    किसने क्या लिक्खा है!

    कौन पढ़ सकता है पानी पे लिखी तहरीरें,किस ने क्या लिक्खा है ये आब-ए-रवाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली

  • 20th Nov 2025

    सब को आता नहीं !

    सब को आता नहीं दुनिया को सजा कर जीना,ज़िंदगी क्या है मोहब्बत की ज़बाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली

  • 20th Nov 2025

    क्या ज़रूरी है कि!

    क्या ज़रूरी है कि हर पर्दा उठाया जाए,मेरे हालात भी अपने ही मकाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली

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