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गिरा है टूटकर शायद!
गिरा है टूट कर शायद मिरी तक़दीर का तारा,कोई आवाज़ आई थी शिकस्त-ए-जाम से पहले| क़तील शिफ़ाई
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कोई गर्दिश नहीं थी!
ये आलम देख कर तू ने भी आँखें फेर लीं वर्ना,कोई गर्दिश नहीं थी गर्दिश-ए-अय्याम से पहले| क़तील शिफ़ाई
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तड़पती हैं तमन्नाएँ!
तड़पती हैं तमन्नाएँ किसी आराम से पहले,लुटा होगा न यूँ कोई दिल-ए-नाकाम से पहले| क़तील शिफ़ाई
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भ्रष्टाचार पेट पर!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं ओम प्रकाश आदित्य जी की एक हास्य कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ- आशा है आपको पसंद आएगी,धन्यवाद । ******
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सज़ाएँ मुझे न दो!
कब मुझ को ए’तिराफ़-ए-मोहब्बत न था ‘फ़राज़’,कब मैं ने ये कहा है सज़ाएँ मुझे न दो| अहमद फ़राज़
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आवारगी- ग़ज़ल
आज मैं अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से. अपने स्वर में ग़ुलाम अली की गाई हुईं मशहूर ग़ज़ल ‘आवारगी’ प्रस्तुत कर रहा हूँ। आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद।
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काँटा हुई तुलसी!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय कैलाश गौतम जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। कैलाश जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कैलाश गौतम जी का यह नवगीत – लहलहाते खेत जैसे दिन हमारेथार कच्चा खा गए । सूखकर काँटा हुई तुलसीहमारी आस्थाधर्म…
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ये भी बड़ा करम है !
ये भी बड़ा करम है सलामत है जिस्म अभी,ऐ ख़ुसरवान-ए-शहर क़बाएँ मुझे न दो| अहमद फ़राज़
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दुआएँ मुझे न दो!
जो ज़हर पी चुका हूँ तुम्हीं ने मुझे दिया, अब तुम तो ज़िंदगी की दुआएँ मुझे न दो| अहमद फ़राज़