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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th Sep 2024

    फ़ैसले वो हैं जो!

    तुझ को बरसों से है क्यूँ तर्क-ए-तअ’ल्लुक़ का ख़याल,फ़ैसले वो हैं जो पल-भर में लिए जाते हैं| शमीम जयपुरी

  • 18th Sep 2024

    पा-ए-नाज़ुक तो !

    उन के क़दमों पे न रख सर के है ये बे-अदबी,पा-ए-नाज़ुक तो सर-आँखों पे लिए जाते हैं| शमीम जयपुरी

  • 18th Sep 2024

    मय भी पी जाती है!

    नश्शा दोनों में है साक़ी मुझे ग़म दे के शराब,मय भी पी जाती है आँसू भी पिए जाते हैं| शमीम जयपुरी

  • 18th Sep 2024

    रौशनी कितने अँधेरों!

    हम हैं एक शम्अ’ मगर देख के बुझते बुझते,रौशनी कितने अँधेरों को दिए जाते हैं| शमीम जयपुरी

  • 18th Sep 2024

    ये सज़ा कम तो नहीं!

    क्यूँ हमें मौत के पैग़ाम दिए जाते हैं,ये सज़ा कम तो नहीं है के जिए जाते हैं| शमीम जयपुरी

  • 18th Sep 2024

    मैं बोल रहा हूँ तुझ में!

    बेवफ़ा तेरी ज़बाँ पर ये वफ़ा की बातें,ऐसा लगता है कि मैं बोल रहा हूँ तुझ में| शमीम जयपुरी

  • 18th Sep 2024

    तुझे ढूँढ रहा हूँ तुझ में!

    पास इतना कि तिरी साँस से टकराती है साँस,दूर इतना कि तुझे ढूँढ रहा हूँ तुझ में| शमीम जयपुरी

  • 18th Sep 2024

    टहनी पर फूल जब खिला!

    आज एक बार फिर मैं विख्यात नवगीतकार स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| | इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी का यह नवगीत – ‘टहनी पर फूल जब खिलाहमसे देखा नहीं गया । एक फूल निवेदित कियागुलदस्ते के हिसाब…

  • 17th Sep 2024

    देख रहा हूँ तुझ में!

    तेरे चेहरे से हटाई नहीं जातीं नज़रें,क्या ख़बर देर से क्या देख रहा हूँ तुझ में| शमीम जयपुरी

  • 17th Sep 2024

    भूल गया हूँ तुझ में!

    तुझ से बिछड़े तो ज़माना हुआ लेकिन अब तक,याद आता है कि कुछ भूल गया हूँ तुझ में| शमीम जयपुरी

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