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रुस्वाइयों से दूर नहीं!
रुस्वाइयों से दूर नहीं बे-क़रारियाँ, दिल को हो काश सब्र का यारा कभी कभी| असर लखनवी
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पतवार!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिन्दी कवि स्वर्गीय शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| सुमन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ जी का यह गीत – तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार। आज सिन्धु ने…
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मैं ने तो होंट सी लिए!
मैं ने तो होंट सी लिए इस दिल को क्या करूँ, बे-इख़्तियार तुम को पुकारा कभी कभी| असर लखनवी
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ख़ुद को तसल्ली देना!
ख़ुद को तसल्ली देना कितना मुश्किल होता है, कोई क़ीमती चीज़ अचानक जब भी खोती है| शहरयार