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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd Nov 2024

    अब अगर हमारे हुए!

    वो ए’तिमाद कहाँ से ‘फ़राज़’ लाएँगे,किसी को छोड़ के वो अब अगर हमारे हुए| अहमद फ़राज़

  • 2nd Nov 2024

    धब्बे और तस्वीर!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय कुँवर नारायण जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| कुँवर नारायण जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुँवर नारायण जी की यह कविता –  वह चित्र भी झूठा नहीं :तब प्रेम बचपन ही सहीसंसार ही जब…

  • 1st Nov 2024

    बर्बाद घर हमारे हुए!

    बुझा के ताक़ की शमएँ न देख तारों को,इसी जुनूँ में तो बर्बाद घर हमारे हुए| अहमद फ़राज़

  • 1st Nov 2024

    चारागर हमारे हुए!

    किसी ने ग़म तो किसी ने मिज़ाज-ए-ग़म बख़्शा,सब अपनी अपनी जगह चारागर हमारे हुए| अहमद फ़राज़

  • 1st Nov 2024

    जिन्हें कोई न मिला!

    अब इक हुजूम-ए-शिकस्ता-दिलाँ है साथ अपने,जिन्हें कोई न मिला हम-सफ़र हमारे हुए| अहमद फ़राज़

  • 1st Nov 2024

    बहुत से लोग!

    किसे ख़बर वो मोहब्बत थी या रक़ाबत थी,बहुत से लोग तुझे देख कर हमारे हुए| अहमद फ़राज़

  • 1st Nov 2024

    बात पर हमारे हुए!

    जो ग़ैर थे वो इसी बात पर हमारे हुए,कि हम से दोस्त बहुत बे-ख़बर हमारे हुए| अहमद फ़राज़

  • 1st Nov 2024

    ध्यान में खोए होंगे!

    क्या अजब है वो मिले भी हों ‘फ़राज़’,हम किसी ध्यान में खोए होंगे| अहमद फ़राज़

  • 1st Nov 2024

    हँसते हुए तारों ने!

    रात भर हँसते हुए तारों ने,उन के आरिज़ भी भिगोए होंगे| अहमद फ़राज़

  • 1st Nov 2024

    ना-ख़ुदाओं ने डुबोए!

    वो सफ़ीने जिन्हें तूफ़ाँ न मिले,ना-ख़ुदाओं ने डुबोए होंगे| अहमद फ़राज़

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